
कोझिकोड, 24 अगस्त . कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने अपने पारंपरिक गढ़ में केरल के पूर्व Chief Minister पिनाराई विजयन और उनकी बेटी वीणा विजयन के समर्थन में कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश की, लेकिन इसे बहुत कम प्रतिक्रिया मिली. इससे Political रूप से संवेदनशील समय में इस परिवार के लिए पार्टी के जमीनी समर्थन पर सवाल उठ रहे हैं.
Sunday देर रात कोझिकोड में एक बैठक हुई. यह बैठक वीना विजयन से जुड़े विवाद पर पार्टी का पक्ष समझाने और उसका बचाव करने के अभियान का हिस्सा थी, लेकिन इसमें बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली दिखीं.
कम लोगों के आने पर सबका ध्यान गया क्योंकि कोझिकोड को राज्य में सीपीआई(एम) के पारंपरिक गढ़ों में से एक माना जाता है.
यह बैठक इसलिए आयोजित की गई थी ताकि सीएमआरएल-एक्सलॉजिक मामले में Enforcement Directorate (ईडी) की जांच और वीणा से पूछताछ के बीच पार्टी एकजुटता दिखा सके और अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट कर सके.
हालांकि, आयोजकों का कहना है कि कम उपस्थिति की एक वजह कार्यक्रम का समय भी था, जो ओणम के त्योहारों के दौरान रखा गया था.
कम उपस्थिति का Political महत्व भी है, क्योंकि वीणा के खिलाफ ईडी की जांच को लेकर महीनों से विवाद चल रहा है और एजेंसी ने इस मामले में उनसे दो बार पूछताछ की है.
यह स्थिति तब बनी है जब इस साल मई में तिरुवनंतपुरम में वीणा से जुड़े एक किराए के घर पर ईडी की छापेमारी के बाद सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था.
हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद पार्टी के करीब दो दर्जन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था. इस दौरान ईडी अधिकारियों पर कथित तौर पर हमले किए गए और उनकी गाड़ियों को निशाना बनाया गया.
इसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को 70 से ज्यादा दिन जेल में बिताने पड़े.
विजयन के परिवार के समर्थन में एकजुट हुए कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और लंबे समय तक हिरासत में रखे जाने से पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं में निराशा हो सकती है, खासकर इसलिए क्योंकि यह विवाद अभी भी जारी है.
कमजोर प्रतिक्रिया इसलिए भी ध्यान देने वाली है क्योंकि सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेताओं से जुड़े मामलों में आम तौर पर जबरदस्त एकजुटता देखने को मिलती रही है, जिसमें पार्टी नेता, कार्यकर्ता और वामपंथी समर्थक उनके बचाव में एक साथ खड़े होते हैं.
हालांकि, विजयन (जो केरल विधानसभा में विपक्ष के मौजूदा नेता हैं) के मामले में, ईडी की छापेमारी और उसके बाद वीणा से पूछताछ के बाद प्रतिक्रिया तुलनात्मक रूप से कमजोर रही है. वामपंथी खेमे की अन्य पार्टियों के नेता भी विजयन और उनके परिवार के बचाव में उतने सक्रिय नहीं दिखे जितनी उम्मीद की जा रही थी.
यह घटनाक्रम विजयन और सीपीआई(एम) के लिए एक मुश्किल दौर में सामने आया है. पार्टी को चुनावी हार और मतदाताओं के कुछ वर्गों से कटाव को लेकर सवालों का सामना करना पड़ रहा है.
इस पृष्ठभूमि में कोझिकोड की बैठक में खाली कुर्सियां सिर्फ एक कम उपस्थिति वाले कार्यक्रम से कहीं ज्यादा मायने रखती हैं. ये संकेत दे सकते हैं कि विजयन और उनके परिवार को लगातार चल रहे विवाद से बचाने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर वैसी ही लामबंदी करने में सीपीआई(एम) नेतृत्व को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
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एससीएच/डीकेपी