किसानों के सहयोग से ही विकास का काम हो सकता है : श्याम रजक

Patna, 25 अगस्त . बिहार की राजधानी Patna में सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों के मार्च पर जदयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने अपनी प्रतिक्रिया दी.

उन्होंने से कहा, “मेरा मानना है कि Government ने जो फैसला लिया है, वह सही है या गलत, यह अलग बात है. लेकिन ज्यादा बेहतर होता अगर यह फैसला किसानों को भरोसे में लेकर लिया जाता. इसकी वजह से किसानों के मन में यह साफ नहीं है कि Government ने सही किया या उनके हित के खिलाफ काम किया. लोगों को इसकी स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए.”

श्याम रजक ने कहा कि विकास के काम का जनता पूरी तरह समर्थन करती है, लेकिन विकास के साथ-साथ उनकी आजादी और उनकी संपत्ति पर उनका मौलिक अधिकार बना रहना चाहिए. उन्होंने कहा, “किसानों के सहयोग से ही विकास का काम हो सकता है. विकास के साथ-साथ उनकी सुरक्षा और उनकी संपत्ति की भी रक्षा होनी चाहिए.”

Maharashtra में ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के मुद्दे पर भी श्याम रजक ने कहा, “सभी को भाषाई आजादी है. और भाषा को लेकर किसी पर भी जबरदस्ती नहीं थोपी जा सकती. Maharashtra में जिस तरह से यह बात कही गई है, वह बिल्कुल अनुचित है. इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए.”

उन्होंने कहा कि मराठी का भी सम्मान है. अगर लोग Maharashtra में हैं तो उन्हें मराठी भी बोलनी चाहिए. लेकिन उनकी अपनी भाषा, उनकी मातृभाषा की जगह उनका अपमान करना या उन्हें किनारे करना बिल्कुल अनुचित है और इसकी निंदा होनी चाहिए.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर जिसमें कहा गया है कि हिजाब स्कूल यूनिफॉर्म में शामिल नहीं है, श्याम रजक ने कहा कि वह कोर्ट के आदेश पर टिप्पणी नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, “इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज द्वारा पारित आदेश के संबंध में हम कोर्ट के आदेश पर टिप्पणी नहीं कर सकते. हालांकि, यह उचित होगा कि ऐसे आदेश लोगों की धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए पारित किए जाएं.”

श्याम रजक ने कहा कि आज चाहे Supreme Court हो, हाईकोर्ट हो या निचली अदालतें, हर जगह करोड़ों मामले लंबित हैं. लोग आते-जाते हैं और कुछ की तो मौत भी हो जाती है, लेकिन उन्हें समय पर न्याय नहीं मिलता.

उन्होंने कहा, “मैं उन पर कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं, लेकिन मेरा कहना है कि अदालतों और जजों को उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए जो सालों से परेशान हैं और मामलों को जल्द से जल्द निपटाने पर ध्यान देना चाहिए. सिर्फ कुछ मुद्दों को ज्यादा प्राथमिकता देकर अलग तरह का माहौल बनाना सही नहीं लगता.”

वीकेयू/पीएम

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