कानून के दायरे में ही मिलेगा मराठा आरक्षण, सरकार बातचीत के लिए तैयार : सीएम फडणवीस

उरण (Maharashtra), 8 सितंबर . Maharashtra के Chief Minister देवेंद्र फडणवीस ने Tuesday को मराठा आरक्षण के चल रहे मुद्दे और एक्टिविस्ट मनोज जरांगे पाटिल की नई मांगों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि उनकी Government ने मराठा समुदाय के फायदे और कल्याण के लिए बड़े फैसले किए हैं और आगे भी लेती रहेगी.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समुदाय को सिर्फ कागजी वादों के बजाय Government के पिछले फैसलों से असल फायदे मिले हैं.

वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के जेएनपीटी-नया उमरगाम हिस्से के उद्घाटन के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सीएम फडणवीस ने फिर कहा कि मराठा समुदाय को दिया जाने वाला कोई भी आरक्षण संवैधानिक दायरे में होना चाहिए और उसे कानूनी जांच में खरा उतरना चाहिए. उन्होंने कानूनी दायरे से बाहर के ऐसे समाधानों के खिलाफ चेतावनी दी जो शायद कोर्ट की समीक्षा में टिक न पाएं.

उन्होंने Government का यह रुख दोहराया कि मराठों को आरक्षण का फायदा देने से दूसरे समूहों को कोई नुकसान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि हम किसी और का हक छीनकर किसी और को नहीं देंगे. उन्होंने भरोसा दिलाया कि ओबीसी कोटा सुरक्षित रहेगा.

मनोज जरांगे पाटिल के चल रहे विरोध और मांगों के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए सीएम फडणवीस ने कहा कि बातचीत के लिए दरवाजे हमेशा खुले हैं. अगर Government के फैसलों को लेकर कोई शक, कमी या गलतफहमी है तो राज्य Government बैठकर उन्हें साफ करने और सुलझाने के लिए तैयार है.

इस बीच मराठा आरक्षण के लिए जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल जारी है और उनकी तबीयत बिगड़ गई है. मंत्रियों उदय सामंत और प्रसाद लाड से फोन पर बातचीत के बाद, वे फोर फ्लूइड (सलाइन) लेने को तैयार हो गए, हालांकि वे अपनी सभी मांगें पूरी होने तक उपवास खत्म न करने के अपने रुख पर अड़े हुए हैं.

इस माहौल में बात करते हुए पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने Tuesday को कहा कि बड़े मुद्दों को सुलझाने में अक्सर समय लगता है. उन्होंने याद दिलाया कि मराठा आरक्षण का मुद्दा पिछले मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में भी अनसुलझा ही रहा था.

उन्होंने कहा कि मौजूदा Chief Minister देवेंद्र फडणवीस, उपChief Minister एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार, सभी इस मामले को लेकर सकारात्मक हैं और समाधान खोजने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं.

मुनगंटीवार ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे को स्थायी रूप से सुलझाने का आखिरी रास्ता संसद में संवैधानिक दायरे के भीतर एक संवैधानिक संशोधन पारित करना है.

उन्होंने कहा कि इस कदम से किसी अन्य समुदाय के मौजूदा कोटे पर बुरा असर डाले बिना मराठा और धनगर समुदायों के लिए आरक्षण का रास्ता साफ हो जाएगा. इसके लिए उन्होंने जोर दिया कि सभी Political दलों के सांसदों को दिल्ली में एकजुट होना चाहिए और Prime Minister के साथ चर्चा करनी चाहिए.

एससीएच/वीसी

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