जनगणना की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं, समय रहते सुधार करें सरकार: कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी

Mumbai , 8 सितंबर . कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने जाति जनगणना, जेनजी से संवाद के दौरान Prime Minister Narendra Modi की टिप्पणी और इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि केवल नारों में जातिगत जनगणना की बात करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर भी इसकी सही व्यवस्था होनी चाहिए.

हरीश चौधरी ने कहा कि जनगणना में पूछे जा रहे सवालों में जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था को लेकर स्पष्टता और सुधार की जरूरत है. जब अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए वर्गीकरण की व्यवस्था है तो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अलग-अलग जातियों की पहचान दर्ज करने की व्यवस्था उसी तरह क्यों नहीं होनी चाहिए. जनगणना में प्रत्येक जाति का सही तरीके से उल्लेख और आंकड़ों का संकलन जरूरी है. कांग्रेस की मांग है कि तेलंगाना और बिहार में हुई जातिगत जनगणना से मिले अनुभवों के आधार पर देश में भी ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए. जनगणना की प्रक्रिया अभी सभी राज्यों में शुरू नहीं हुई है, इसलिए समय रहते व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है. उन्होंने Government से प्रक्रिया को दुरुस्त कर देश के साथ न्याय करने की मांग की.

वडोदरा में जेन के साथ संवाद के दौरान Prime Minister मोदी की ‘नाराज फूफा’ वाली टिप्पणी पर चौधरी ने आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि Prime Minister पद संवैधानिक और गरिमापूर्ण पद है और इस पद पर रहते हुए शब्दों का चयन भी उसी अनुरूप होना चाहिए. देश के छात्र अपनी समस्याओं और अपेक्षाओं को लेकर Prime Minister से संवाद चाहते हैं, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय हल्की टिप्पणियां की जा रही हैं. Prime Minister मोदी को छात्रों की वास्तविक चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए.

इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों के लिए प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को कथित तौर पर अनुमति नहीं मिलने पर कांग्रेस विधायक ने Government पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र Government और भाजपा शासित राज्यों में लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है और इंदौर में भी ऐसा ही प्रयास हो रहा है.

चौधरी ने कहा कि यदि छात्रों को अपने कार्यक्रम के लिए स्टेडियम की अनुमति नहीं मिलती है तो वे कहीं और एकत्र होकर अपनी बात रख सकते हैं. कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को अपनी समस्याएं और विचार रखने के लिए मंच उपलब्ध कराना है. आयोजन में Political मुद्दों के बजाय छात्रों की बातों पर ध्यान दिया जाना है. चौधरी ने सवाल किया कि छात्रों को अपनी आवाज रखने के लिए मंच देना आखिर गलत कैसे हो सकता है. छात्रों की एकजुटता किसी भी कथित दबाव या रोक के प्रयास का जवाब दे सकती है. उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां छात्रों की एकजुटता ने Government की मंशा को प्रभावित किया था और देशभर में भी छात्र अपनी आवाज मजबूती से उठा सकते हैं.

भाजपा की ओर से ‘छात्रों की गूंज’ को कथित तौर पर झूठ की गूंज बताए जाने और Prime Minister मोदी की जेनजी संबंधी टिप्पणी पर चौधरी ने कहा कि ऐसी बातें पहले भी जंतर-मंतर के संदर्भ में कही गई थीं. उन्होंने पीएम मोदी के social media पर छात्रों के साथ संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि बाद में Prime Minister ने खुद social media मंचों पर युवाओं के साथ बातचीत की. युवाओं की भावनाओं और उनकी बातों को केवल आंकड़ों और social media पहुंच के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उनकी वास्तविक समस्याओं को भी समझना चाहिए.

पीएसके

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