प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप भाषा हो, ‘नाराज फूफा’ जैसे शब्द क्यों: रागिनी नायक

New Delhi, 8 सितंबर . वडोदरा में Prime Minister Narendra Modi के भाषण को लेकर कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने Prime Minister की ओर से इस्तेमाल किए गए ‘नाराज फूफा’ और ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों पर सवाल उठाते हुए कहा कि Prime Minister पद की गरिमा के अनुरूप भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए. उन्होंने युवाओं, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और किसानों से जुड़े मुद्दों पर Government से गंभीर चर्चा की मांग की.

रागिनी नायक ने कहा कि Prime Minister मोदी खुद नकारात्मक टिप्पणियां करने के बाद दूसरों से सकारात्मकता की अपेक्षा करते हैं, जो उन्हें हास्यास्पद लगता है. Prime Minister पद की गरिमा को ध्यान में रखते हुए भाषा का चयन नहीं किया जा रहा है. ‘दिमागी नक्सल’, ‘नाराज फूफा’, ‘अर्बन नक्सल’ और ‘आंदोलनजीवी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है, यह समझ से परे है. छात्रों से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी वास्तविक समस्याओं पर चर्चा होनी चाहिए.

एसआरसीसी में Prime Minister मोदी के कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि वहां छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर घोषणाएं होनी चाहिए थीं. उन्होंने दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए भवन हादसे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि छात्र सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल हैं. नायक ने जेपी नड्डा की ओर से पार्टी के नए कार्यालयों का जिक्र किए जाने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि यदि बड़ी संख्या में पार्टी कार्यालय बने हैं तो देश में कितने नए हॉस्टल, कॉलेज और अस्पताल बनाए गए, इस पर चर्चा क्यों नहीं होती.

उन्होंने कहा कि देश के युवाओं, महिलाओं, किसानों, रोजगार और महंगाई से जुड़े सवालों पर गंभीरता से बात होनी चाहिए. केवल हंसी-मजाक और Political टिप्पणियों से देश की समस्याओं का समाधान नहीं होगा.

कांग्रेस नेता ने 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के आंकड़े का उल्लेख करते हुए Government पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि एक तरफ आर्थिक विकास के आंकड़ों की बात की जाती है, वहीं दूसरी तरफ गरीबी और बच्चों की स्थिति से जुड़े वीडियो सामने आते हैं. ऐसे माहौल में Government की उपलब्धियों के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है. उन्होंने Prime Minister मोदी पर अपने चुनावी वादों को लेकर भी हमला बोला और कहा कि Government को जनता से किए गए वादों और मौजूदा समस्याओं पर जवाब देना चाहिए.

अखिलेश यादव की पार्टी के लाल रंग से नीले रंग की ओर बदलाव को लेकर भाजपा के सवाल पर रागिनी नायक ने भाजपा पर ही पलटवार किया. उन्होंने कहा कि भाजपा को दूसरों के कपड़ों और रंगों पर टिप्पणी करने से पहले अपने Political रुख पर जवाब देना चाहिए.

नायक ने Prime Minister मोदी के अलग-अलग चुनावी मुद्दों पर दिए गए बयानों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव के समय जाति, वर्ग और सामाजिक पहचान के मुद्दों का इस्तेमाल Political लाभ के लिए किया जाता है. उन्होंने राहुल गांधी द्वारा जातिगत जनगणना की मांग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब जातिगत जनगणना की बात होती है तो Government की ओर से अलग-अलग वर्गों को अलग तरीके से परिभाषित किया जाता है. रंगों को लेकर टिप्पणी करने के बजाय Government को जनता के वास्तविक मुद्दों पर जवाब देना चाहिए.

रागिनी नायक ने उत्तर प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने नीति आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि इन क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश की स्थिति निचले पायदानों पर है. उन्होंने कहा कि Political दलों को कपड़ों, खानपान और रंगों पर टिप्पणी करने के बजाय यह बताना चाहिए कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में राज्य की स्थिति बेहतर क्यों नहीं हुई. उन्होंने भाजपा से इन सभी सवालों का जवाब देने की मांग की.

धीरेंद्र शास्त्री से जुड़े नॉन-वेज विवाद पर कांग्रेस नेता ने कहा कि India का संविधान हर धर्म, जाति, वर्ग और क्षेत्र के लोगों को समान अधिकार देता है. खानपान की व्यक्तिगत पसंद भी नागरिक अधिकारों से जुड़ी है और किसी के संवैधानिक अधिकारों का क्षरण करना गैरकानूनी है. कानून के दायरे में रहते हुए हर व्यक्ति को अपनी पसंद के अनुसार जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए.

पीएसके

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