कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर राजनीति न हो, केंद्र ने एनजीटी के आदेश पर जारी की अधिसूचना: आर. अशोक

Bengaluru, 21 सितंबर . कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता आर. अशोक ने Monday को कहा कि केंद्र Government ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के आदेश के अनुसार कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी की है और यह स्वैच्छिक निर्णय नहीं है.

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और सूखे पर चर्चा के लिए बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र में आर. अशोक ने राज्य Government को जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण कराने और अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखने के लिए सक्षम वकीलों की नियुक्ति करने की सलाह दी.

उन्होंने चेतावनी दी कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के लागू होने से किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा.

आर. अशोक ने कहा कि कांग्रेस के मंत्रियों को यह कहना बंद करना चाहिए कि यह आदेश Prime Minister ने जारी किया है. इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि एनडीए Government ने यह आदेश जारी नहीं किया था, बल्कि यह अदालत के निर्देशों के आधार पर तैयार किया गया था.

उन्होंने सुझाव दिया कि कर्नाटक को केरल मॉडल अपनाना चाहिए. केरल Government ने जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण कर बागानों और मकानों की पहचान की थी तथा अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और केंद्र Government को सौंपी थी. इससे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) का दायरा कम करने में मदद मिली थी.

आर. अशोक ने बताया कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट में कर्नाटक के 1,576 गांवों और 20,668 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र बताया गया है, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है. उन्होंने कहा कि सैटेलाइट चित्रों में खेतों और कॉफी बागानों को गलत तरीके से जंगल के रूप में दर्ज कर दिया गया है, जिससे 10 जिलों के लाखों किसानों के सामने समस्याएं खड़ी हो गई हैं.

भाजपा नेता ने कहा कि वन विभाग और राजस्व विभाग के बीच समन्वय की कमी के कारण गांवों में सड़कों का निर्माण प्रभावित हो रहा है. उन्होंने कहा, “मानसून में यदि कोई पुल टूट जाता है तो उसकी मरम्मत तक नहीं हो सकती. बिजली कनेक्शन देने में भी दिक्कत आती है. अगर वन विभाग बफर जोन बनाता है तो समस्याएं और बढ़ जाएंगी.”

आर. अशोक ने राज्य Government से जमीनी सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार कर उसे केंद्र Government और एनजीटी को भेजने तथा पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ वकीलों की नियुक्ति कर Supreme Court में प्रभावी पैरवी करने की अपील की.

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राज्य Government ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो एनजीटी केंद्र Government को रिपोर्ट लागू करने का निर्देश दे सकता है. पश्चिमी घाट के महत्व का जिक्र करते हुए अशोक ने कहा कि यह क्षेत्र छह राज्यों में फैले 1,64,280 वर्ग किलोमीटर इलाके को कवर करता है, 40 लाख टन कार्बन अवशोषित करता है और यहां आठ जैव विविधता हॉटस्पॉट तथा 325 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं.

उन्होंने याद दिलाया कि 2010 में गठित माधव गाडगिल समिति ने कड़े प्रतिबंधों की सिफारिश की थी. विरोध के बाद कस्तूरीरंगन समिति बनाई गई, जिसने 37 प्रतिशत क्षेत्र (59,940 वर्ग किलोमीटर) को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील घोषित करने का सुझाव दिया.

आर. अशोक ने कहा कि गोवा फाउंडेशन लगातार गाडगिल रिपोर्ट को लागू करने की मांग कर रहा है और इस संबंध में Supreme Court का दरवाजा भी खटखटा चुका है. एनजीटी ने निर्देश दिया है कि 2017 की अधिसूचना में कोई बदलाव नहीं किया जाए और केंद्र Government अधिकरण के निर्देशों के अनुसार कई बार अधिसूचनाएं जारी कर चुकी है. आर. अशोक ने यह भी कहा कि केंद्र Government ने अब संजय कुमार की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है, जिसका कार्यकाल 2027 तक रहेगा.

एएसएच/वीसी

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