सेना के अग्निवीरों के लिए रोजगार से जुड़े कौशल कार्यक्रम

New Delhi, 23 सितंबर . भारतीय सेना ने एक ऐसी पहल की है जो अग्निवीरों और नियमित सैनिकों को कौशल देने का काम करती है. ‘प्रोजेक्ट कौशलवीर’ नामक इस प्रशिक्षण को भारतीय सेना के अग्निवीरों द्वारा आगे चलकर रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में इस्तेमाल किया जा सकेगा. खास बात यह है कि ये प्रशिक्षण कार्यक्रम ऐसे विषयों पर आधारित है जिसें उद्योग मान्यता अथवा स्वीकृति देते हैं.

‘प्रोजेक्ट कौशलवीर’ के तहत सैनिकों को कौशल प्रशिक्षण के साथ प्रमाण-पत्र देने पर जोर है. यानी सेना में सेवा के दौरान हासिल किए गए कौशल को औपचारिक प्रमाणन से जोड़ा जा रहा है. इससे सैनिकों के लिए सेना में सेवा के बाद आगे की पढ़ाई और रोजगार के रास्ते आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है.

भारतीय सेना ने पहली बार कौशल दिवस भी मनाया है. यहां सैनिकों के सैन्य प्रशिक्षण के साथ उनके भविष्य के करियर पर भी जोर दिया गया. इस मौके पर ‘प्रोजेक्ट कौशलवीर’ के सफल क्रियान्वयन को रेखांकित किया गया. इस पहल का महत्व खास तौर पर अग्निवीरों के लिए है. सैन्य सेवा के दौरान उन्हें सैन्य प्रशिक्षण के साथ ऐसे कौशल भी मिलेंगे, जिनका उपयोग वे आगे अपने करियर में कर सकते हैं. इस तरह प्रोजेक्ट कौशलवीर सैनिकों की वर्तमान सेवा और उनके भविष्य के अवसरों के बीच एक कड़ी बनाने का काम कर रहा है.

कौशल दिवस कार्यक्रम की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल विपुल शिंगल, डीसीओएएस (आईएसएंडटी) ने की. कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर उमा कांजीलाल और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर अखिलेश मिश्रा भी शामिल हुए. कार्यक्रम में प्रोजेक्ट कौशलवीर कंपेंडियम और एनआईओएस प्रिसिस का विमोचन किया गया. इसके साथ ही अग्निवीरों के पहले बैच को माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक प्रमाण-पत्र भी दिए गए.

यह कदम सैन्य सेवा के साथ शिक्षा को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण है. भारतीय सेना ने प्रोजेक्ट कौशलवीर को अपने ‘योद्धा प्रथम’ दृष्टिकोण का हिस्सा बताया है.

सेना के अनुसार, यह पहल उसके परिवर्तनकारी दृष्टिकोण ‘जय से विजय’ के अनुरूप है. इसका लक्ष्य सैनिकों को सेवा के दौरान ही ऐसे कौशल और प्रमाणन के अवसर देना है, जो भविष्य में उनकी शैक्षणिक और रोजगार संबंधी संभावनाओं में काम आ सकें. ‘योद्धा को सक्षम बनाना, भविष्य को तैयार करना’ की सोच के साथ शुरू की गई यह पहल सैन्य प्रशिक्षण को केवल वर्तमान जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रखती. इसका फोकस सैनिकों को भविष्य के लिए भी तैयार करने पर है.

जीसीबी/डीकेपी

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