हामिद अंसारी के बयान से असहमत, धर्म को आतंक से न जोड़ा जाए: मौलाना शहाबुद्दीन

बरेली, 21 सितंबर . ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन ने Samajwadi Party, अखिलेश यादव और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कई अहम मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सपा के पीडीए फॉर्मूले में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए और कहा कि मुस्लिम समाज के बीच इस बात को लेकर चर्चा है कि Political प्रतिनिधित्व आबादी के अनुपात में नहीं मिल रहा है. उन्होंने अखिलेश यादव से 2027 के विधानसभा चुनाव में Chief Minister पद के लिए किसी मुस्लिम चेहरे की घोषणा करने और मुस्लिम बहुल सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की मांग की.

मौलाना शहाबुद्दीन ने पूर्व उपPresident हामिद अंसारी के हालिया बयान पर असहमति जताई. उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म को आतंकवाद या कट्टरपंथ से जोड़ना उचित नहीं है और सभी समुदायों को मिलकर कट्टरपंथी विचारधारा का मुकाबला करना चाहिए.

सपा सांसद इकरा हसन ने हाल में 2027 में उत्तर प्रदेश में Samajwadi Party की Government बनने की बात कही थी और पीडीए को सपा की ताकत बताया था. इकरा के इस बयान पर मौलाना शहाबुद्दीन ने पीडीए में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज की नजर में पीडीए में ‘मुस्लिम’ शब्द स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता. यदि मुस्लिम समुदाय को इसमें अलग पहचान के साथ शामिल किया जाता तो इसका नाम पीडीएम क्यों नहीं रखा गया. अखिलेश यादव अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच जाते समय पीडीए की व्याख्या अलग-अलग तरीके से करते हैं. ओबीसी, ब्राह्मण, क्षत्रिय और मुस्लिम समाज के बीच पीडीए के Political अर्थ को अलग-अलग तरीके से पेश किया जाता है. प्रदेश में पीडीए को लेकर अभी तक स्पष्टता नहीं बन पाई है और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच इस फॉर्मूले को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं.

पूर्व उपPresident हामिद अंसारी के हालिया बयान पर मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि हामिद अंसारी देश की बड़ी शख्सियत हैं, विद्वान हैं और उन्होंने लंबे समय तक देश की सेवा की है. वह अंसारी के बयान के पूरे हिस्से से सहमत नहीं हैं. किसी एक धर्म को कट्टरपंथ या आतंकवाद से जोड़कर बात नहीं की जानी चाहिए. आतंकवाद और कट्टरपंथ को धर्म से अलग रखकर देखा जाना चाहिए.

मौलाना ने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, जैन या कोई भी धर्म अपने आप में आतंकवादी या फिरकापरस्त नहीं होता. समाज में अलग-अलग समुदायों के बीच कुछ ऐसे लोग हो सकते हैं जो हिंसा, कट्टरता या सामाजिक अशांति फैलाने का प्रयास करें, लेकिन उनके कृत्य को पूरे धर्म या समुदाय से जोड़ना उचित नहीं है. India में कट्टरपंथी विचारधारा के बढ़ने की चिंता को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों को मिलकर ऐसी विचारधाराओं का मुकाबला करना होगा.

उन्होंने इसे सामाजिक समस्या बताते हुए कहा कि ऐसी प्रवृत्तियों से पूरे समाज और देश को नुकसान पहुंच सकता है. Political या धार्मिक पहचान के बजाय कट्टरपंथ और आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक रूप से कार्रवाई की जानी चाहिए.

अखिलेश यादव की ओर से Prime Minister Narendra Modi पर सवालों का जवाब नहीं देने को लेकर की जाने वाली टिप्पणियों का हवाला देते हुए मौलाना शहाबुद्दीन ने सपा प्रमुख से भी जवाब मांगा. उन्होंने कहा कि करीब दो महीने पहले उन्होंने अखिलेश यादव को पत्र लिखकर 2027 के चुनाव में Chief Minister पद के लिए किसी मुस्लिम चेहरे की घोषणा करने की मांग की थी, लेकिन उन्हें अभी तक उसका जवाब नहीं मिला है. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने Samajwadi Party से जुड़े लोगों पर वक्फ संपत्तियों से संबंधित कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच को लेकर भी सवाल उठाए थे और इस पर भी अखिलेश यादव की ओर से जवाब नहीं आया. अखिलेश यादव को Prime Minister मोदी पर सवाल उठाने से पहले उनके द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देना चाहिए.

मौलाना शहाबुद्दीन ने एक बार फिर अपनी प्रमुख मांग दोहराते हुए कहा कि Samajwadi Party को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए Chief Minister पद के संभावित चेहरे के रूप में किसी मुस्लिम नेता का नाम घोषित करना चाहिए. उन्होंने इसे मुस्लिम समाज की Political अपेक्षा बताते हुए कहा कि Samajwadi Party लंबे समय से मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन का दावा करती रही है, इसलिए प्रतिनिधित्व के सवाल पर भी स्पष्टता होनी चाहिए. उन्होंने मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम उम्मीदवारों को पर्याप्त टिकट दिए जाने की मांग भी रखी. मौलाना के मुताबिक मुस्लिम समाज को लगता है कि पिछली Lok Sabha और विधानसभा चुनावों में उसकी आबादी के अनुपात में Political प्रतिनिधित्व नहीं मिला.

मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि मुस्लिम समाज अब Political प्रतिनिधित्व के मुद्दे को गंभीरता से देख रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चुनावों में मुस्लिम आबादी के अनुपात में पर्याप्त संख्या में उम्मीदवार नहीं उतारे गए. उन्होंने मुस्लिम आबादी का आंकड़ा करीब 22 प्रतिशत और यादव आबादी करीब 7 प्रतिशत बताते हुए कहा कि Political प्रतिनिधित्व में इन अनुपातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए. 2027 में मुस्लिम समाज केवल Political नारों के आधार पर फैसला नहीं करेगा, बल्कि उम्मीदवारों, प्रतिनिधित्व और नेतृत्व में अपनी हिस्सेदारी को भी देखेगा. उन्होंने आगे कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाता यह देखेंगे कि कौन-सी पार्टी और कौन-सा Political गठबंधन उन्हें कितना प्रतिनिधित्व देता है.

पीएसके

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