कर्नाटक: 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी को मौत की सजा

मैसूरु, 17 अक्टूबर . कर्नाटक के मैसूरु की फास्ट ट्रैक अदालत ने Saturday को 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में आरोपी कार्तिक को मौत की सजा सुनाई. बच्ची पिछले साल दशहरा उत्सव के दौरान अपने परिवार के साथ गुब्बारे बेचने के लिए मैसूरु आई थी. न्यायाधीश अनिल पी. वाघाडे ने यह फैसला सुनाया. अदालत ने एक दिन पहले ही आरोपी को इस मामले में दोषी ठहराया था. इस घटना ने कर्नाटक सहित पूरे देश को झकझोर दिया था.
पीड़ित बच्ची का परिवार दशहरा प्रदर्शनी मैदान के सामने, मैसूरु महल के सामने की ओर एक अस्थायी तंबू लगाकर रह रहा था. उत्सव के दौरान परिवार वहीं ठहरा हुआ था. घटना वाले दिन तड़के आरोपी कार्तिक कथित तौर पर बच्ची को उस समय तंबू से बाहर ले गया, जब वह अपने माता-पिता के पास सो रही थी. इसके बाद उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर दी. बच्ची के शरीर पर चाकू से वार किए जाने के 19 निशान मिले थे.
घटना के बाद नजराबाद Police ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. शुरुआत में Police के पास कोई ठोस सुराग नहीं था. इसके बाद जांचकर्ताओं ने आसपास के इलाकों के cctv फुटेज खंगालने शुरू किए. इसी दौरान एक छोटी-सी फुटेज में एक व्यक्ति को ऑटो रिक्शा से उतरकर संदिग्ध तरीके से घूमते हुए देखा गया. इस फुटेज से जांच को अहम सुराग मिला.
इसके बाद Police ने आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया. कार्तिक मांड्या जिले के श्रीरंगपट्टनम तालुक के सिद्धलिंगपुरा गांव का रहने वाला है. जांच के दौरान Police को पता चला कि कार्तिक को इससे पहले एक महिला से दुष्कर्म की कोशिश के मामले में गिरफ्तार किया गया था और वह दो साल जेल में रह चुका था. जमानत पर बाहर आने के बाद वह कथित तौर पर अपने परिवार के पास नहीं लौटा और शराब का आदी हो गया था. वह अलग-अलग जगहों पर घूमता रहता था.
Police हिरासत के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर Policeकर्मियों पर हमला करने और भागने की भी कोशिश की थी. इस दौरान Police ने गोली चलाई, जिससे उसके पैर में चोट लगी. जांच टीम ने अपराध से जुड़े विवरण और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों को आरोपपत्र में शामिल किया. अभियोजन पक्ष की ओर से Governmentी वकील जयवंती ने मामले की पैरवी की और आरोपी के लिए अधिकतम सजा की मांग की.
बच्ची की निर्मम हत्या के बाद इस मामले में व्यापक आक्रोश देखने को मिला था. अदालत के मृत्युदंड सुनाने के फैसले को इस मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है.
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डीएससी


