कर्नाटक के भटकल से जुड़ा है अमेरिका के नवनिर्वाचित सीनेटर अब्दुल एल-सैयद का नाता

वाशिंगटन, 5 नवंबर . मिशिगन से सीनेट चुनाव जीतने वाले डेमोक्रेट अब्दुल एल-सैयद का India के कर्नाटक से भी गहरा रिश्ता है. उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू भारतीय मूल की हैं, जिनकी जड़ें कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ स्थित भटकल में हैं. इस तरह एल-सैयद का अमेरिकी Political सफर India के एक तटीय कस्बे से जुड़े पारिवारिक संबंधों के कारण भी चर्चा में है.
42 वर्षीय एल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व सांसद माइक रोजर्स को लगभग 52 प्रतिशत के मुकाबले 46 प्रतिशत मतों से हराया. वह निवर्तमान डेमोक्रेटिक सीनेटर गैरी पीटर्स की जगह लेंगे.
एल-सैयद की पत्नी डॉ. सारा जुकाकू का जन्म और पालन-पोषण मिशिगन में हुआ. उनके माता-पिता India से अमेरिका जाकर बसे थे. उनका परिवार भटकल से जुड़ा है, जो मंगलुरु से करीब 140 किलोमीटर उत्तर में स्थित है और जिसकी आबादी लगभग 46 हजार है.
सारा के पिता डॉ. तैयब जुकाकू भटकल के रहने वाले हैं और पेशे से किडनी रोग विशेषज्ञ हैं. उनके दादा जेएच शम्सुद्दीन जुकाकू वकील थे और पूर्व मैसूर राज्य Government में Chief Minister बीडी जत्ती के कार्यकाल में उप वित्त मंत्री रहे थे.
जुकाकू परिवार नावायत समुदाय से ताल्लुक रखता है. यह दक्षिण-पश्चिम India के तटीय इलाकों में रहने वाला मुस्लिम व्यापारी समुदाय है.
सारा ने मिशिगन विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र और नियर ईस्टर्न स्टीज में अध्ययन किया. इसके बाद ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री और कोलंबिया विश्वविद्यालय से मेडिकल डिग्री हासिल की. एल-सैयद और सारा की मुलाकात मिशिगन विश्वविद्यालय में मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन के माध्यम से हुई थी. दोनों ने 2006 में शादी की. उनकी दो बेटियां हैं.
एल-सैयद का नाम उपPresident जेडी वेंस के साथ Political विवाद को लेकर भी चर्चा में रहा है. वेंस की पत्नी उषा वेंस भारतीय-अमेरिकी हैं. एल-सैयद ने अगस्त में अपनी भारतीय मूल की पत्नी और बच्चों के संदर्भ में वेंस पर टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि उनके बच्चे भी उतने ही अमेरिकी हैं जितने किसी अन्य अमेरिकी परिवार के बच्चे.
इस टिप्पणी पर मिशिगन रिपब्लिकन पार्टी की सह-अध्यक्ष सनी रेड्डी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि उषा वेंस की भारतीय विरासत को Political मजाक का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए.
चुनाव प्रचार के अंतिम सप्ताह में दक्षिण एशियाई और भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने भी एल-सैयद का समर्थन किया. 30 अक्टूबर को इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के इम्पैक्ट फंड और साथ फंड ने मिशिगन के वेस्टलैंड में ‘लाइट अप द वोट’ नाम से दिवाली कार्यक्रम आयोजित किया.
इस कार्यक्रम में मिशिगन की सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जोसलिन बेन्सन, राज्य विधानसभा में डेमोक्रेटिक नेता रंजीव पुरी और सिनसिनाटी के मेयर आफताब प्योरवाल भी शामिल हुए. एल-सैयद ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों के साथ दीप जलाया और उनसे मतदान में सक्रिय भागीदारी की अपील की.
उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी आवाज उठाने और मतदान के जरिए लोकतंत्र को मजबूत बनाने का साहस दिखाना चाहिए. उन्होंने समुदाय की ओर से मिले स्वागत के लिए आभार भी जताया.
मिशिगन में जन्मे एल-सैयद मिस्र से अमेरिका आए प्रवासी मोहम्मद के बेटे हैं. उन्होंने मिशिगन विश्वविद्यालय से स्नातक किया और ऑक्सफोर्ड में रोड्स स्कॉलर के रूप में डॉक्टरेट हासिल की. इसके बाद कोलंबिया विश्वविद्यालय से मेडिकल डिग्री ली और वहां सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान में महामारी विज्ञान पढ़ाया.
2015 में डेट्रॉयट के तत्कालीन मेयर माइक डगन ने उन्हें शहर का स्वास्थ्य निदेशक नियुक्त किया था. उन्होंने बच्चों को मुफ्त चश्मे उपलब्ध कराने, स्कूलों से सीसा हटाने और ओवरडोज की स्थिति में इस्तेमाल होने वाली दवा नारकन की उपलब्धता बढ़ाने जैसे कार्यक्रम चलाए.
2017 में उन्होंने पद छोड़कर मिशिगन के गवर्नर पद का चुनाव लड़ा, लेकिन 2018 के डेमोक्रेटिक प्राइमरी में ग्रेचेन व्हिटमर से हार गए. इस चुनाव में भारतीय मूल के कारोबारी श्री थानेदार भी उम्मीदवार थे. बाद में थानेदार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य बने.
एल-सैयद ने सीएनएन के लिए Political टिप्पणीकार और पॉडकास्ट होस्ट के रूप में भी काम किया. उन्होंने ‘हीलिंग पॉलिटिक्स’ और ‘मेडिकेयर फॉर ऑल : ए सिटिजन गाइड’ जैसी किताबें लिखीं.
2022 के अंत से अप्रैल 2025 तक उन्होंने वेन काउंटी के स्वास्थ्य, मानव एवं पूर्व सैनिक सेवा विभाग का नेतृत्व किया. यह विभाग करीब 18 लाख लोगों को सेवाएं देता है. इस दौरान उन्होंने लगभग तीन लाख लोगों के 70 करोड़ डॉलर तक के चिकित्सा ऋण को माफ करने की योजना शुरू की.
सीनेट चुनाव में स्वास्थ्य सेवाओं की सार्वभौमिक उपलब्धता उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रही. उन्होंने ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’ का समर्थन किया है. विदेश नीति के मोर्चे पर उन्होंने गाजा युद्ध को नरसंहार बताया है और इजरायल को हथियारों की आपूर्ति पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की वकालत की है.
एल-सैयद ने सीनेट की स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम एवं पेंशन समिति में जगह पाने की इच्छा जताई है. साथ ही उन्होंने विदेश संबंध समिति में भी रुचि दिखाई है.
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केआर/


