उमर खालिद और शरजील इमाम जमानत के हकदार, फैसला दलीलों पर निर्भर: मौलाना शहाबुद्दीन

बरेली, 5 नवंबर . दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि दोनों आरोपियों को Supreme Court में जमानत याचिका दाखिल करने का पूरा कानूनी अधिकार है. हालांकि, उन्हें जमानत मिलेगी या नहीं, इसका फैसला अदालत सुनवाई के दौरान पेश की जाने वाली दलीलों और सबूतों के आधार पर करेगी. मौलाना ने उम्मीद जताई कि Supreme Court से दोनों को राहत मिल सकती है.
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि 2020 में दिल्ली में बहुत बड़ा और भयावह दंगा हुआ था. इस मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को आरोपी बनाया गया. दोनों ने पहले जिला अदालत और फिर दिल्ली हाई कोर्ट में जमानत के लिए अर्जियां दाखिल की थीं, लेकिन उनकी याचिकाएं खारिज कर दी गईं. अब उन्होंने Supreme Court में जमानत के लिए जाने का फैसला किया है.
उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया है. किसी भी कैदी को यह अधिकार प्राप्त है कि वह निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय और Supreme Court तक अपनी जमानत के लिए अर्जी दाखिल कर सकता है. अदालत में अपनी बात रखना और जमानत की मांग करना कानूनी अधिकार के दायरे में आता है.
मौलाना ने कहा कि जमानत देना या नहीं देना अदालत का अधिकार है. इसका निर्णय संबंधित मामले की दलीलों और उपलब्ध सबूतों को देखने के बाद किया जाता है. इसलिए अभी यह कहना उचित नहीं होगा कि उमर खालिद और शरजील इमाम को Supreme Court से जमानत मिलेगी या नहीं. जब याचिका पर तारीख तय होगी और दोनों पक्षों के बीच बहस होगी, तभी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. फिलहाल अदालत से यही उम्मीद की जा सकती है कि दोनों को जमानत मिल जाए.
Lucknow में शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने भी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि Supreme Court में जमानत की अर्जी दाखिल करना दोनों का अधिकार है. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के तथ्यों को जिस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है और जमानत के रास्ते में जिस प्रकार बाधाएं खड़ी की जा रही हैं, वह किसी भी भारतीय नागरिक के लिए ठीक नहीं है.
मौलाना सैफ अब्बास ने यह भी आरोप लगाया कि पूरी व्यवस्था एक साथ मिलकर साजिश कर रही है. उन्होंने कहा कि किसी नागरिक के कानूनी अधिकारों के मामले में इस तरह की स्थिति उचित नहीं है.
दिल्ली में उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने बताया कि Supreme Court में उमर खालिद की जमानत याचिका दाखिल कर दी गई है. उन्होंने कहा कि याचिका के तीन प्रमुख आधार हैं. Supreme Court ने अपने पिछले फैसले में एक साल बाद दोबारा अदालत का रुख करने की अनुमति दी थी, लेकिन इसके साथ दो शर्तें भी रखी थीं. इन शर्तों में गवाहों की जांच शुरू होना और मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ना शामिल था. अभी तक मुकदमा शुरू नहीं हुआ है और गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है. इसी आधार पर Supreme Court में फिर से जमानत की मांग की गई है.
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पीएसके


