
Mumbai , 10 सितंबर . नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) ऐसे समय पर बाजार में कदम रखने जा रहा है, जब एक्सचेंज इक्विटी ऑप्शंस में घटते मार्केट शेयर, सख्त होते डेरिवेटिव्स नियम और सीमित ग्रोथ के मौके जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है.
एनएसई की ओर से आरएचपी में दी गई जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में इक्विटी ऑप्शंस (प्रीमियम वैल्यू) सेगमेंट में उसका मार्केट शेयर 96.9 प्रतिशत था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर 87.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 में 74.71 प्रतिशत रह गया है.
इस तरह बीते तीन वित्त वर्षों में इस सेगमेंट में एनएसई का मार्केट शेयर 22.2 प्रतिशत कम हो गया है. हालांकि, अन्य सेगमेंट में एनएसई की पकड़ मजबूत बनी हुई है.
दूसरी तरफ एनएसई का कैश सेगमेंट में मार्केट शेयर लगातार 90 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है, जो सीमित विकास के मौकों को दिखाता है.
एनएसई का मार्केट शेयर इक्विटी कैश सेगमेंट में वित्त वर्ष 2023-24 में 92.7 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2024-25 में 93.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 में 92.99 प्रतिशत था.
Government की ओर से डेरिवेटिव्स से जुड़े नियमों को सख्त बनाना भी एनएसई के आगे एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. निवेशकों की ओर से लगातार बड़ा नुकसान करने के कारण पिछले कुछ वर्षों में Government ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को कम करने के लिए कुछ सख्त कम उठाए हैं, इसमें सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में वृद्धि और मार्जिन को कम करना जैसे कदम शामिल हैं. इसके अलावा, बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) भी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को लेकर निवेशकों में जागरूकता फैला रहा है.
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) सेगमेंट में विशिष्ट खुदरा निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 26 में करीब 20 प्रतिशत घटकर 78.6 लाख रह गई है, जो कि वित्त वर्ष 25 में 98.1 लाख थी.
एनएसई ने भी अपनी आरएचपी में कहा है कि डेरिवेटिव्स विशेषकर एफएंडओ मार्केट में वॉल्यूम में कमी उसके कारोबार पर नकारात्मक असर डाल सकती है और इससे उसका मुनाफा भी प्रभावित हो सकता है.
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एबीएस