पेपर लीक विवाद: नवी मुंबई में संभाजी ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने एमपीएससी सेक्रेटरी के चेहरे पर पोती काली स्याही

पुणे, 11 सितंबर . Maharashtra लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की खाद्य एवं औषधि प्रशासन (पीडीए) परीक्षा का पेपर लीक होने से जुड़ा विवाद काफी बढ़ गया है.

एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार के इस्तीफे की मांग को लेकर पूरे राज्य में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच Friday को नवी Mumbai में संभाजी ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने एमपीएससी सेक्रेटरी महेंद्र हरपालकर के चेहरे पर काली स्याही पोत दी.

इस घटना का एक वीडियो social media पर तेजी से वायरल हो गया, जो पुणे और छत्रपति संभाजीनगर जैसे प्रमुख केंद्रों पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के बढ़ते गुस्से को दिखाता है.

इस हरकत को सही ठहराते हुए संभाजी ब्रिगेड के राज्य प्रवक्ता संतोष शिंदे ने कहा कि यह विरोध 25 लाख एमपीएससी उम्मीदवारों और Maharashtra के 12 करोड़ नागरिकों की निराशा को दर्शाता है.

शिंदे ने कहा, “एमपीएससी अधिकारी महेंद्र हरपालकर पर स्याही पोतना और उन्हें थप्पड़ मारना इस भ्रष्ट सिस्टम और नाकाबिल Government को जनता की ओर से सीधे थप्पड़ मारने जैसा है.”

एमपीएससी सेक्रेटरी पर हुए हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद गुट) के विधायक रोहित पवार ने छात्रों के गुस्से को तो माना, लेकिन अपनी पार्टी को इस हिंसक हरकत से अलग रखा.

उन्होंने कहा, “इसमें कोई शक नहीं कि एमपीएससी चेयरमैन और सेक्रेटरी ने पेपर लीक और भ्रष्टाचार के जरिए छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है और छात्रों में बहुत ज्यादा गुस्सा है, हालांकि हमारा विरोध संवैधानिक दायरे में होना चाहिए. बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा दिया गया संविधान बहुत शक्तिशाली है और हम निश्चित रूप से इसके जरिए सफल होंगे. संवैधानिक रास्ता ही सही रास्ता है. हम किसी पर स्याही फेंकने जैसी हरकतों का कभी समर्थन नहीं करते.”

कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि Maharashtra लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के सेक्रेटरी का चेहरा काला करने की घटना, राज्य Government के प्रति लाखों छात्रों और अभिभावकों की गहरी नाराजगी और गुस्से का नतीजा है.

उन्होंने कहा, “हम इस हिंसा का समर्थन नहीं करते. किसी को भी कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए, लेकिन Government को अब इस घटना को पूरी गंभीरता से लेना चाहिए और ऐसे गुस्से के फूटने का इंतजार नहीं करना चाहिए. छात्रों की मांगों और भावनाओं को नजरअंदाज करना Government के लिए महंगा पड़ सकता है. इसलिए तुरंत ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, वरना जनता का यह गुस्सा और बढ़ेगा.”

धाराशिव में पत्रकारों से बात करते हुए राज्य के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने इस हमले की कड़ी निंदा की और प्रदर्शनकारियों को सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी. उन्होंने कहा, “इस तरह के विरोध-प्रदर्शन से भले ही पब्लिसिटी मिल जाए, लेकिन इससे समस्या का समाधान नहीं होगा. राज्य Government ने पेपर लीक के मामले को बहुत गंभीरता से लिया है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, हालांकि हम ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे जिनसे राज्य में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो.”

Friday की यह घटना Maharashtra के Chief Minister देवेंद्र फडणवीस द्वारा Thursday को यह घोषणा किए जाने के एक दिन बाद हुई कि एक विशेष जांच दल (एसआईटी) एमपीएससी ग्रुप-बी और ग्रुप-सी की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं (2025) की जांच करेगा.

Chief Minister ने एमपीएससी उम्मीदवारों के साथ बैठक के बाद कहा, “पिछले दो वर्षों में आयोजित एमपीएससी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं की व्यापक जांच की जाएगी. 2025 की मुख्य परीक्षा के प्रश्न पत्रों की पूरी तरह से दोबारा जांच की जाएगी. जांच पूरी होने तक संबंधित भर्ती प्रक्रियाओं के लिए साक्षात्कार (इंटरव्यू) कार्यक्रम को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है.”

धाराशिव में तनाव तब और बढ़ गया जब मराठा कार्यकर्ताओं ने मंत्री योगेश कदम के काफिले को रोक दिया, जो परंडा की ओर जा रहे थे. प्रदर्शनकारियों ने मराठा कार्यकर्ता मनोज जारांगे पाटिल की चल रही भूख हड़ताल के प्रति राज्य Government की उदासीनता पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया.

आंदोलनकारी मंत्री कदम की उस हालिया सार्वजनिक चेतावनी से भी नाराज थे, जिसमें उन्होंने उपChief Minister एकनाथ शिंदे के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल न करने को कहा था. जोर-जोर से नारे लगाते हुए भीड़ ने जवाब मांगने के लिए काफिले को रोक लिया, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई और मौके पर भारी Police बल तैनात करना पड़ा.

डीके/वीसी

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