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Sunday, 18 October 2026
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एकता कपूर के ‘हिंदूफोबिया’ वाले बयान पर संतों का समर्थन, बोले- ‘फिल्मों में हिंदू धर्म को गलत तरीके से दिखाया गया’

एकता कपूर के ‘हिंदूफोबिया’ वाले बयान पर संतों का समर्थन, बोले ‘फिल्मों में हिंदू धर्म को गलत तरीके से दिखाया गया’

एकता कपूर के ‘हिंदूफोबिया’ वाले बयान पर संतों का समर्थन, बोले- ‘फिल्मों में हिंदू धर्म को गलत तरीके से दिखाया गया’

अयोध्या, 16 अक्टूबर . प्रोड्यूसर एकता कपूर के Bollywood में ‘हिंदूफोबिया’ को लेकर दिए गए बयान पर अब साधु-संतों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. अयोध्या से लेकर उज्जैन और वाराणसी तक कई संतों ने एकता कपूर की बात का समर्थन किया है.

संतों का आरोप है कि हिंदी फिल्मों में दूसरे धर्मों को सकारात्मक तरीके से दिखाया जाता है, जबकि हिंदू धर्म, मंदिरों, पूजा-पाठ और धार्मिक प्रतीकों को कई बार गलत या नकारात्मक रूप में पेश किया जाता है. कुछ संतों ने इस मुद्दे पर Government से कार्रवाई की मांग की है.

हनुमानगढ़ी के महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने एकता कपूर के बयान का समर्थन करते हुए इसे देश का दुर्भाग्य बताया. से बातचीत में उन्होंने कहा, ”India में सनातन धर्म को मानने वालों की बड़ी संख्या है और दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा भी इसी परंपरा से जुड़ा है. इसके बावजूद फिल्मों में हिंदू देवी-देवताओं को नकारात्मक रूप में दिखाया जाता है, जबकि हिंदू धर्म के विरोधियों को सकारात्मक तरीके से पेश किया जाता है.”

महंत डॉ. देवेशाचार्य ने फिल्मों के उदाहरण देते हुए कहा, ”कई बार कहानी में हीरो को गोली लगने के बाद मजार पर जाते और ठीक होते दिखाया जाता है, जबकि चोरी जैसी घटनाओं को मंदिरों से जोड़कर दिखाया जाता है. मैं एकता कपूर की तारीफ करता हूं कि उन्होंने हिम्मत जुटाकर इस मुद्दे पर अपनी बात रखी. हम एकता कपूर के साथ हैं.”

अयोध्या के महंत सीताराम दास जी महाराज ने भी एकता कपूर की टिप्पणी को सही बताया. उन्होंने कहा, ”फिल्मों में दूसरे धर्मों को खूबसूरती के साथ दिखाया जाता है, लेकिन सनातन धर्म को ज्यादातर नकारात्मक तरीके से पेश किया जाता है. फिल्मी जगत में कुछ लोग धर्म से जुड़े विषयों को गलत तरीके से दिखाते हैं और इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है. इस तरह के माहौल में लोग खुलकर तिलक लगाने या अपने धर्म के बारे में बोलने से भी हिचकिचाते हैं. फिल्मों के जरिए सनातन धर्म को कमजोर दिखाने की कोशिश हो रही है. ऐसे मामलों में Government को कार्रवाई करनी चाहिए.”

महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने भी एकता कपूर का समर्थन किया. उन्होंने कहा, ”फिल्मों में मस्जिदों में चादर चढ़ाने जैसे सीन्स को दिखाया जाता है, लेकिन जब हिंदू धर्म, तिलक, पूजा-पाठ या संतों की वेशभूषा की बात आती है, तो कई बार उसे निंदनीय तरीके से पेश किया जाता है. फिल्मी जगत में कुछ लोग ऐसे हैं जो हिंदू धर्म के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं. हम साधु-संत एकता कपूर के साथ हैं. मेरा विश्वास है कि सच्चाई देर से सामने आए, लेकिन सामने जरूर आती है.”

उज्जैन में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी महाराज ने भी Bollywood में हिंदूफोबिया पर एकता कपूर की टिप्पणी का समर्थन किया. उन्होंने कहा, ”हिंदू धर्म को दुनियाभर में अक्सर गलत समझा जाता है. सनातन संस्कृति केवल धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक आध्यात्मिक दर्शन है, जो ब्रह्मांड के हर कण में दिव्यता देखता है. सनातन संस्कृति के व्यापक अर्थ को समझने की जरूरत है.”

वाराणसी के जगतगुरु श्री बालक देवाचार्य जी महाराज ने भी एकता कपूर की बात का समर्थन करते हुए Bollywood पर हिंदू और सनातन धर्म को गलत तरीके से दिखाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ”Prime Minister मोदी और उत्तर प्रदेश के Chief Minister योगी की Governmentों के दौरान फिल्मों में धर्म को पहले की तुलना में ज्यादा सकारात्मक तरीके से दिखाया जाने लगा है.”

वहीं, अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि के आचार्य विट्ठल जी महाराज ने कहा, ”एकता कपूर ने फिल्मों में हिंदू धर्म की प्रस्तुति को लेकर सही मुद्दा उठाया है. सिनेमा समाज का दर्पण होता है, लेकिन कई फिल्मों में विलेन के नाम हिंदू धर्म से जुड़े होते हैं, जिससे नकारात्मक छवि बनती है. मेरा मानना है कि सिनेमा में हिंदू धर्म को नीचा दिखाने की कोशिशों का विरोध होना चाहिए.”

दरअसल, एकता कपूर ने हाल ही में रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान Bollywood में कथित ‘हिंदूफोबिया’ का मुद्दा उठाया था. उन्होंने सवाल किया था कि फिल्म इंडस्ट्री विदेशी फैंटेसी और एनिमेटेड कहानियों को आसानी से स्वीकार कर लेती है, लेकिन भारतीय लोककथाओं और पौराणिक कहानियों को लेकर उतनी सहज क्यों नहीं है. भारतीय संस्कृति और आस्था से जुड़ी कहानियों को भी फिल्मों में जगह मिलनी चाहिए और दर्शकों को उन्हें स्वीकार करना चाहिए.

बातचीत के दौरान एकता ने बताया कि कैसे लोगों ने उन्हें ‘तांत्रिक’ तक का लेबल दे दिया था. उन्होंने कहा, ”माथे पर टीका लगाना और हाथ में धागा बांधना किसी सनकी जैसा दिखना कैसे हो गया? अपनी आस्था को खुलकर जाहिर करना लोगों के लिए इतनी बड़ी समस्या क्यों बन जाता है, मैं बता भी नहीं सकती.”

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पीके/एबीएम

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