
जालना, 8 सितंबर . मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल का Monday -Tuesday की दरमियानी रात चिकित्सा उपचार कराया गया. मराठा समाज की विभिन्न मांगों को लेकर उनका आमरण अनशन जारी है और Tuesday को उनके अनशन का 11वां दिन है.
तबीयत ज्यादा बिगड़ने के कारण देर रात में डॉक्टरों की टीम ने जरांगे को सलाइन लगाई. रात में जब डॉक्टरों की टीम ने उनकी जांच की तो पता चला कि अनशन के कारण उनका शुगर लेवल काफी कम हो गया है और उन्हें चक्कर भी आ रहे थे. इसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत सलाइन के जरिए उनका उपचार शुरू किया.
इस बीच तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिलते ही मंत्री उदय सामंत और विधायक प्रसाद लाड ने मनोज जरांगे से फोन पर संपर्क किया. दोनों नेताओं ने उनसे उपचार लेने का अनुरोध किया और आश्वासन दिया कि आज यानी 8 सितंबर से सभी मुद्दों पर काम शुरू करके उन्हें हल किया जाएगा.
इस अनुरोध के बाद मनोज जरांगे ने रात करीब ढाई बजे सलाइन लेने के लिए सहमति दी. इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने उन्हें सलाइन लगाई और उनका उपचार शुरू किया.
बताया जा रहा है कि आज Government के प्रतिनिधिमंडल के अंतरवाली सराटी आने के आसार हैं. Government की ओर से मराठा आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की कोशिश जारी है.
मनोज जरांगे पिछले 11 दिनों से आमरण अनशन पर हैं और उनकी तबीयत लगातार कमजोर हो रही है. समर्थकों में उनकी सेहत को लेकर चिंता बनी हुई है, जबकि प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है.
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल और आंदोलनकारियों की मांग है कि Maharashtra के सभी मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी मानकर उन्हें ओबीसी कोटे में शामिल किया जाए.
कुनबी Maharashtra में कृषि से जुड़ा एक समुदाय है, जिसे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा मानकर पहले से ही ओबीसी श्रेणी में आरक्षण का लाभ मिलता है.
इससे पहले भी मराठा आरक्षण को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था, तब Government ने हैदराबाद गजेटियर और निजाम काल के दस्तावेजों के आधार पर यह व्यवस्था की थी कि जिन मराठा परिवारों के पास ऐतिहासिक रूप से कुनबी वंश से जुड़े दस्तावेज या पुराने साक्ष्य मिलेंगे, उन्हें कुनबी जाति प्रमाण पत्र दिया जाएगा.
Maharashtra के मौजूदा ओबीसी और कुनबी संगठनों का कहना है कि सभी मराठों को सरसकट (बिना उचित प्रमाण के) कुनबी का दर्जा देने से उनके कोटे का हक कम होगा.
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वीकेयू/एएस