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Friday, 23 October 2026
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ईडी ने निवेश धोखाधड़ी मामले में 1.66 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की

ईडी ने निवेश धोखाधड़ी मामले में 1.66 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की

New Delhi, 22 अक्टूबर . Enforcement Directorate (ईडी) के दिल्ली जोनल कार्यालय-II ने शांति स्वरूप सतीजा और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत 1.66 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है. यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है.

ईडी ने 21 अक्टूबर को जारी अनंतिम कुर्की आदेश (पीएओ) संख्या 24/2026 के तहत यह कार्रवाई की. कुर्क की गई संपत्तियां Rajasthan के jaipur जिले की विराट नगर तहसील के धानी गैसकान गांव में स्थित जमीन हैं. ये संपत्तियां श्री गणेशम बिल्ड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक अनिल कुमार शर्मा के नाम पर हैं.

ईडी के अनुसार, यह कार्रवाई अपराध से अर्जित आय के बराबर मूल्य की संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए की गई है. जांच में सामने आया कि अपराध से अर्जित 1.66 करोड़ रुपये की राशि श्री गणेशम बिल्ड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक अनिल कुमार शर्मा को हस्तांतरित की गई थी और उनके पास रखी गई थी.

ईडी ने दिल्ली Police द्वारा दर्ज 10 First Information Report के आधार पर जांच शुरू की थी. इन मामलों की जांच दिल्ली Police की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 420 और 120बी के तहत की थी.

जांच के अनुसार, शांति स्वरूप सतीजा ने मेसर्स संपत्ति ट्रेडिंग एंड डेवलपर्स लिमिटेड और मेसर्स संपत्ति डेवलपर्स के माध्यम से निवेश योजनाओं और जमीन परियोजनाओं में निवेश के लिए लोगों को कथित तौर पर आकर्षित किया. निवेशकों को हर महीने 2 से 3 प्रतिशत तक निश्चित रिटर्न देने का वादा किया गया था.

ईडी के मुताबिक, शुरुआती अवधि में कुछ निवेशकों को रिटर्न दिया गया, लेकिन बाद में भुगतान बंद हो गया. इसके बाद कई निवेशकों को उनकी मूल निवेश राशि भी वापस नहीं मिली. जांच में यह भी पता चला कि शांति स्वरूप सतीजा के नियंत्रण वाली संस्थाओं से धनराशि Rajasthan में जमीन खरीदने के लिए श्री गणेशम बिल्ड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और अनिल कुमार शर्मा को हस्तांतरित की गई थी.

ईडी ने बताया कि अपराध से अर्जित मूल धनराशि को अन्यत्र खर्च कर दिए जाने के कारण उसके बराबर मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है. इसका उद्देश्य धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत अपराध से अर्जित आय के मूल्य को सुरक्षित रखना है. मामले में आगे की जांच जारी है.

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डीएससी

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