
New Delhi, 13 सितंबर . ब्रिक्स समिट के दौरान India ने बड़ा काम किया. Prime Minister की अध्यक्षता में संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसमें सबसे अहम बिंदु पहलगाम हमले की निंदा रही. सेवानिवृत मेजर जनरल और डिफेंस एक्सपर्ट पीके सहगल के मुताबिक India ने जो हासिल किया वो अद्भुत है.
रक्षा विशेषज्ञ ने ग्लोबल सिक्योरिटी आर्किटेक्चर पर ब्रिक्स में भारत, रूस और चीन की मौजूदगी के असर, रूस के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग और चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच India का रणनीतिक संतुलन जैसे अहम मुद्दों पर से बात की.
उन्होंने कहा, “जो India ने हासिल किया उसकी किसी से तुलना नहीं की जा सकती, वो एक मिसाल है. India ने दुनिया को जता दिया (खासकर पश्चिम को) कि वो एक ऐसा देश है जो अमेरिका, रूस, चीन और ईरान के साथ बिना अपने हितों से समझौता किए बात करने का दम रखता है.”
उनके मुताबिक, “हिंदुस्तान की सुरक्षा में भी सुधार होने जा रहा है. पीएम मोदी- शी जिनपिंग की मुलाकात हुई. इसमें पीएम ने कह दिया कि एलएसी पर शांति-स्थिरता बरकरार होना जरूरी है. वहीं रूस के साथ भी India ने विक्रेता और खरीदार के रिश्ते को अलग करने की बात कही है. India ने मेड इन इंडिया पर जोर दिया है. हर चीज के संयुक्त उत्पादन को महत्व दिया है. रूस India को एसयू57 देना चाहता है तो डिमांड है कि वो सोर्स कोड दे, ताकि अपने रडार और सेंसर्स को हम इंटिग्रेट कर सकें.”
डिफेंस एक्सपर्ट ने रक्षा क्षेत्र में India की उम्मीदों का जिक्र करते हुए कहा,” India रूस से तीन चीजें चाहता है: पहला एसयू30 को अपग्रेड (इसमें 11 बिलियन डॉलर खर्च होंगे) किया जाता है तो अगले 20-30 साल के काम आएगा. दूसरा एसयू57 जिसे रूस खुद फीफ्थ जेनेरेशन फाइटर कहता है और वो टेक्नोलॉजी के साथ India को ट्रांसफर करने को तैयार है. लेकिन सवाल है कि वो कितनी टेक्नोलॉजी India को देगा, क्योंकि India उसके रिपयेर से लेकर मेंटेनेंस तक India में करना चाहता है. लेकिन रूस ने ये ऑफर नहीं किया है. रूस दो स्कॉवर्डन तत्काल देने को तैयार है और कह रहा है कि बाकी 3-4 स्कॉवर्डन पर India में ही मिलकर काम किया जा सकता है. तीसरा India रूस से लॉन्ग रेंज मिसाइल चाहता है जो 350 किलोमीटर दूरी तय कर सकता है.”
पीके सहगल के मुताबिक घोषणापत्र में टेरर को लेकर स्पष्ट रुख भी काफी अहम है. उन्होंने कहा, “ये बड़ी उपलब्धि है क्योंकि ब्रिक्स में चीन भी मौजूद था. एक ऐसा देश जो हमेशा Pakistan के साथ खड़ा दिखता है. यहीं पर बिना किसी देश का नाम लिए पहलगाम हिंसा की निंदा की गई. सब जानते थे कि इशारा किस की ओर था. इसमें स्पष्ट किया गया कि आतंक के हर फॉर्म की आलोचना होनी चाहिए, ये देखे बगैर कि उसका स्रोत क्या है या उसके पीछे की वजह क्या रही और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.”
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केआर/