
बीजिंग, 13 सितंबर . ब्रिक्स देशों के नेताओं की 18वीं बैठक New Delhi में आयोजित हुई. इस मौके पर New Delhi घोषणा जारी की गई. घोषणा में पारस्परिक सम्मान और समझ, संप्रभु समानता, एकजुटता और लोकतंत्र, खुलेपन और समावेशिता, सहयोग को गहरा करने और आम सहमति की ब्रिक्स भावना को दोहराया गया.
पिछले 20 वर्षों के सहयोग और सदस्य देशों के विस्तार के बाद Political और सुरक्षा, आर्थिक-व्यापारिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक और मानविकी आदान-प्रदान के “त्रि-आयामी” सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया. साथ ही, अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई गई.
घोषणा में वैश्विक शासन में सुधार और उसे बेहतर बनाने, परामर्श, सह-निर्माण और साझा लाभ के सिद्धांत को अपनाने तथा संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका की रक्षा करने पर जोर दिया गया. साथ ही, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों का पूरी तरह पालन करने, बहुध्रुवीयता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लोकतंत्रीकरण को बढ़ावा देने की बात कही गई. वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व और उनकी आवाज़ को मजबूत करने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार का समर्थन करने और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को और मजबूत करने की अपील की गई. इसके अलावा, अफ्रीकी देशों की ‘एज़ुलविनी आम सहमति’ और ‘सिर्ते घोषणा’ में व्यक्त वैध आकांक्षाओं को मान्यता दी गई.
अंतरराष्ट्रीय आर्थिक शासन के संदर्भ में घोषणा में ब्रेटन वुड्स संस्थानों में सुधार की मांग की गई, ताकि उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज़ और प्रतिनिधित्व को बढ़ाया जा सके. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की 16वीं कोटा समीक्षा में तय कोटा वृद्धि को जल्द लागू करने और 17वीं कोटा समीक्षा में सार्थक कोटा समायोजन की योजना तैयार करने की मांग की गई.
विश्व व्यापार संगठन में सुधार, बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की रक्षा और विवाद निपटान तंत्र को बहाल करने के लिए भी दृढ़ समर्थन जताया गया. घोषणा में एकपक्षीय टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों के साथ-साथ एकपक्षीय दबाव वाले उपायों का विरोध किया गया. वहीं, चीन द्वारा 53 अफ्रीकी देशों के लिए शून्य-टैरिफ उपाय लागू किए जाने की सराहना की गई.
इसके अलावा, घोषणा में मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई गई. सभी पक्षों से विवादों का Political और कूटनीतिक समाधान तलाशने तथा स्थिति को और बिगड़ने से रोकने की अपील की गई. वैश्विक सैन्य खर्च में तेज बढ़ोतरी और परमाणु जोखिम बढ़ने पर भी चिंता व्यक्त की गई तथा निरस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार व्यवस्था को फिर से मजबूत करने पर जोर दिया गया. साथ ही, क्यूबा पर एकपक्षीय नाकाबंदी की निंदा की गई.
घोषणा में सतत विकास और समावेशी विकास को भी महत्व दिया गया. 2030 एजेंडा को लागू करने के साथ स्वास्थ्य, ऊर्जा संक्रमण, नई औद्योगिक क्रांति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया. न्यू डेवलपमेंट बैंक के दूसरे ‘स्वर्णिम दशक’ की शुरुआत का स्वागत किया गया और उसके विस्तार का समर्थन किया गया. इसके अलावा, ब्रिक्स औद्योगिक क्षमता केंद्र, लघु एवं मध्यम उद्यम मंच और व्यावसायिक शिक्षा गठबंधन जैसे मंचों की भूमिका की भी सराहना की गई.
अंत में, घोषणा में वर्ष 2027 में चीन की ब्रिक्स अध्यक्षता और चीन में ब्रिक्स देशों के नेताओं की 19वीं बैठक आयोजित करने के लिए पूर्ण समर्थन व्यक्त किया गया.
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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