वाईएसआरसीपी की आंध्र प्रदेश में हेरिटेज साइट के पास माइनिंग रोकने के लिए केंद्र से दखल की मांग

अमरावती, 13 अगस्त . वाईएसआरसीपी नेता वाईवी. सुब्बा रेड्डी ने Thursday को राज्यसभा में आंध्र प्रदेश के पंचदारला हेरिटेज इलाके के पास माइनिंग एक्टिविटी का मुद्दा उठाया और प्राचीन स्थलों के साथ ही प्राकृतिक जल धाराओं की सुरक्षा के लिए केंद्र से तुरंत दखल देने की मांग की.

मिनरल्स अमेंडमेंट बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान सुब्बा रेड्डी ने सदन का ध्यान पंचदारला में संरक्षित बौद्ध स्थल और प्राचीन धर्मलिंगेश्वर स्वामी मंदिर के पास हो रही माइनिंग गतिविधियों की ओर खींचा.

उन्होंने कहा कि पंचदारला की पहचान मंदिर परिसर से बहने वाली पांच प्राकृतिक जल धाराओं से गहराई से जुड़ी है. उन्होंने संरक्षित हेरिटेज एरिया के पास बढ़ती माइनिंग गतिविधियों पर चिंता जताई.

सुब्बा रेड्डी ने इलाके के तुरंत निरीक्षण, पर्यावरण पर पड़ने वाले कुल असर का व्यापक आकलन और जल धाराओं के वैज्ञानिक हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन की मांग की. उन्होंने कानूनी और पर्यावरणीय मंजूरियों की जांच की भी मांग की.

उन्होंने मांग की कि जब तक निरीक्षण और अध्ययन पूरे नहीं हो जाते, तब तक इलाके में माइनिंग गतिविधियों और उनसे जुड़ी योजनाओं को रोक दिया जाए. मिनरल्स अमेंडमेंट बिल पर बोलते हुए सुब्बा रेड्डी ने कहा कि खनिज संपदा लोगों की है और इसके प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के लिए माइनिंग का एक स्पष्ट ढांचा जरूरी है, लेकिन इससे राज्य के रेवेन्यू, स्थानीय लोगों की आजीविका या पर्यावरण संरक्षण से समझौता नहीं होना चाहिए. माइनिंग से होने वाले तत्काल वित्तीय, पर्यावरणीय और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े खर्च राज्यों को उठाने पड़ते हैं. इसलिए, माइनिंग नीतियां बनाते समय उनके हितों और रेवेन्यू की रक्षा की जानी चाहिए.

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि राष्ट्रीय स्तर पर अधिकार केंद्रित करने से जमीनी स्तर पर अवैध और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली माइनिंग गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई कमजोर नहीं होनी चाहिए.

इससे पहले वाईएसआरसीपी सांसद गोला बाबूराव, अराकू सांसद गुम्मा तनुजा रानी, ​​पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ और अन्य लोगों ने केंद्रीय मंत्रियों को माइनिंग के मुद्दे पर शिकायतें सौंपी थीं.

बाबूराव ने कहा कि राज्य में गठबंधन Government के नेता प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं और पुराने विशाखापत्तनम जिले में पहाड़ियों और मंदिरों के आस-पास के इलाकों को बर्बाद कर रहे हैं.

तनुजा रानी ने कहा कि केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को स्थिति के बारे में जानकारी दी गई थी और उन्होंने भरोसा दिलाया था कि एक केंद्रीय टीम माइनिंग गतिविधियों की जांच करेगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर 10 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू की जाएगी.

उन्होंने कहा कि आधिकारिक जांच में पाया गया है कि माइनिंग और ब्लास्टिंग से होने वाले कंपन का असर पवित्र जल धाराओं पर पड़ रहा है और मंजूर किए गए माइनिंग प्लान से ज्यादा लगभग दो लाख टन बजरी निकाली गई है.

गुडीवाड़ा अमरनाथ ने अनाकापल्ली सांसद सी.एम. की भूमिका की सीबीआई जांच की मांग की.

एससीएच/एबीएम

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