
jaipur, 13 अगस्त . Rajasthan कैबिनेट ने Thursday को आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी. अहम फैसलों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल और Rajasthan वृक्ष संरक्षण बिल को मंजूरी देना शामिल था.
दोनों बिल 20 अगस्त से शुरू होने वाले Rajasthan विधानसभा के सत्र में पेश किए जाएंगे. कैबिनेट ने राज्य Government के कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रमोशन के लिए जरूरी अनिवार्य सेवा अवधि में दो साल की छूट को भी मंजूरी दी.
कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि Government का मकसद ‘एक राज्य, एक कानून’ के सिद्धांत को लागू करना है. कैबिनेट ने प्रस्तावित यूसीसी बिल को मंजूरी दी, जिसका मकसद शादी, तलाक, विरासत, गुजारा-भत्ता और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों को एक ही कानूनी ढांचे के तहत लाना है.
हालांकि, आदिवासी समुदायों द्वारा माने जाने वाले रीति-रिवाजों और परंपराओं को इस प्रस्तावित कानून के दायरे से बाहर रखा गया है. प्रस्तावित कानून के तहत, शादी का रजिस्ट्रेशन 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य होगा. तलाक का रजिस्ट्रेशन भी जरूरी होगा. साथ ही, लिव-इन रिलेशनशिप शुरू होने और खत्म होने की जानकारी भी देनी होगी.
रजिस्ट्रेशन की जरूरतों को पूरा न करने पर 10,000 रुपए का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है. कानून बनने के बाद, प्रस्तावित यूसीसी बहुविवाह, यानी एक ही समय में एक से ज्यादा लोगों से शादी करने पर रोक लगाएगा. साथ ही, यह कानून कुछ समुदायों में पहले से लागू पाबंदियों के बिना दोबारा शादी करने की सुविधा भी देगा.
विरासत से जुड़े प्रस्तावित नियमों का मकसद सभी धर्मों में बेटों और बेटियों के लिए संपत्ति का समान अधिकार तय करना है. बिल में पुश्तैनी संपत्ति पर पोते-पोतियों के अधिकारों से जुड़े बदलावों का भी प्रस्ताव है. प्रस्तावित ढांचे के तहत, अगर किसी व्यक्ति के दादा के जीवित रहते हुए उसके पिता की मृत्यु हो जाती है, तो भी उस व्यक्ति (पोते) का संपत्ति पर अधिकार बना रहेगा.
कैबिनेट ने Rajasthan वृक्ष संरक्षण बिल को भी मंजूरी दी, जिसका मकसद पूरे राज्य में पेड़ों के संरक्षण को मजबूत करना है. मंत्री जोगाराम पटेल के अनुसार, प्रस्तावित कानून के तहत 29 खास तरह के पेड़ों को काटने पर रोक लगाई जाएगी, जिनमें खेजड़ी (जिसे कल्पवृक्ष माना जाता है) और रोहिडा (Rajasthan का राज्य वृक्ष) शामिल हैं.
इस कदम को आध्यात्मिक गुरुओं और पर्यावरणविदों की भावनाओं का सम्मान करते हुए पर्यावरण की रक्षा करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
हालांकि, खास हालात में सक्षम अधिकारी से मंजूरी लेने के बाद संरक्षित पेड़ों को काटने की इजाजत दी जा सकती है. प्रस्तावित कानून में संरक्षित पेड़ों को बिना इजाजत काटने पर 1 लाख रुपए तक का जुर्माना और एक साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है.
ये नियम निजी जमीन पर मौजूद पेड़ों पर भी लागू होंगे, सिवाय उन मामलों के जो कानून में अलग से बताए गए हैं. जहां पेड़ काटना जरूरी माना जाएगा, वहां सक्षम अधिकारी से पहले से मंजूरी लेना जरूरी होगा.
किसी संरक्षित पेड़ को काटने की मंजूरी, बदले में पेड़ लगाने (कम्पेन्सेटरी प्लांटेशन) की शर्त से जुड़ी होगी. प्रस्तावित नियमों के तहत, आवेदन करने वाले को काटे गए पेड़ों की संख्या से 10 प्रतिशत ज्यादा पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी लेनी होगी. अगर आवेदन करने वाला पेड़ नहीं लगा पाता है, तो उसे Government के पास तय रकम जमा करनी होगी. इसके बाद Government उस पैसे का इस्तेमाल पेड़ लगाने के कामों में करेगी.
कैबिनेट ने राज्य Government के कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रमोशन के लिए तय सर्विस या अनुभव की शर्त में दो साल की छूट को भी मंजूरी दी. हालांकि Government ने राज्य के बजट में इस छूट का ऐलान किया था, लेकिन कैबिनेट की मंजूरी न मिलने की वजह से जरूरी नोटिफिकेशन जारी नहीं हो पाया था.
जो कर्मचारी पिछले तीन सालों में इस फायदे का लाभ नहीं उठा पाए हैं, वे अब लागू शर्तों के तहत इस छूट के लिए पात्र होंगे.कैबिनेट के ये फैसले आने वाले पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता (मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट) लागू होने की संभावना से पहले आए हैं.
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एससीएच/पीएम