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Sunday, 8 November 2026
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आंध्र प्रदेश में ‘कुम्की’ हाथियों की वजह से लोगों की मौत के मामले घटे: पवन कल्याण

आंध्र प्रदेश में ‘कुम्की’ हाथियों की वजह से लोगों की मौत के मामले घटे: पवन कल्याण

विशाखापत्तनम, 13 अगस्त . आंध्र प्रदेश के उपChief Minister पवन कल्याण ने Thursday को कहा कि जंगली हाथियों के आतंक को रोकने के लिए ‘कुम्की’ हाथियों को तैनात करने से जंगलों के आसपास के इलाकों में इंसानों की मौत के मामलों में 70 प्रतिशत की कमी आई है.

पवन कल्याण ने यहां ‘विश्व हाथी दिवस’ के राष्ट्रीय स्तर के समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हाथी-इंसान के बीच टकराव को संभालने से फसलों को होने वाले नुकसान में भी कमी आई है.

उन्होंने बताया कि कर्नाटक Government की मदद से चार ‘कुम्की’ हाथी लाए गए और उन्हें इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव को रोकने के लिए खास तौर पर प्रशिक्षित किया गया. उन्होंने कहा कि इन उपायों के संबंधित क्षेत्रों में अच्छे नतीजे मिल रहे हैं.

पवन कल्याण ने आंध्र प्रदेश को ‘कुम्की’ हाथी उपलब्ध कराने के लिए कर्नाटक Government का धन्यवाद किया.

उन्‍होंने कहा, “यह सिर्फ दो राज्यों के बीच सहयोग नहीं है, यह लोगों, प्रकृति और वन्यजीवों की भलाई के लिए मिलकर किया गया प्रयास है. ‘कुम्की’ हाथियों ने उपद्रवी हाथियों के आतंक को रोकने के लिए 15 अभियानों में मदद की है. इससे जंगलों के आसपास के इलाकों में इंसानों की मौत के मामलों में 70 प्रतिशत की कमी आई है और फसलों को होने वाले नुकसान में भी कमी आई है.”

उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश Government ने अपने खुद के ‘कुम्की’ हाथियों को प्रशिक्षित करने का काम भी शुरू कर दिया है. ऐसा ही एक प्रशिक्षित हाथी, ‘जयंत’, पहले से ही पार्वतीपुरम मन्यम इलाके में तैनात है. उन्होंने कहा कि राज्य की योजना हर साल दो ‘कुम्की’ हाथियों को प्रशिक्षित करने की है.

आंध्र प्रदेश के उपChief Minister और पर्यावरण एवं वन मंत्री पवन कल्याण ने कहा कि इलाकों में हाथियों के झुंड से जुड़ी गंभीर समस्याएं होती थीं. लगभग 132 से 142 हाथियों के झुंड इन इलाकों में भारी तबाही मचाते थे. चित्तूर जिले के पलमनेर इलाके और पार्वतीपुरम मन्यम जिले में जब ये झुंड फसलों पर हमला करते और उन्हें बर्बाद करते थे तो लोगों में दहशत फैल जाती थी. साथ ही, रास्ते में आने वाले किसी भी व्यक्ति पर वे हमला कर देते थे.

उन्होंने कहा कि वन और पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद उनका मुख्य ध्यान हाथियों से जुड़ी लोगों की समस्याओं को हल करने पर था.

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया.

पवन कल्याण ने कहा कि हाथी पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में पुल का काम करते हैं और देश की वन्यजीव विरासत के प्रतीक हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र Government हाथियों के संरक्षण को बहुत ज्‍यादा प्राथमिकता देती है. 2014 से देश में हाथी संरक्षण केंद्रों की संख्या 26 से बढ़कर 33 हो गई है.

पवन कल्याण ने यह भी दावा किया कि ‘हनुमान’ प्रोजेक्ट अच्छा नतीजा दे रहा है, जिसे वन्यजीवों की सुरक्षा और इंसानों व वन्यजीवों के बीच टकराव को पूरी तरह रोकने के लिए बनाया गया है. मार्च 2026 में शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट इंसानों और वन्यजीवों के टकराव को संभालने का एक व्यापक सिस्टम है. यह सिस्टम टेक्नोलॉजी और तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता का इस्तेमाल करके वन्यजीवों के साथ टकराव से होने वाले नुकसान को कम करता है.

उन्होंने कहा, “इस पहल के तहत हमने 93 रिस्पॉन्स गाड़ियां और 7 वाइल्डलाइफ एम्बुलेंस तैनात की हैं. अब तक 200 से ज्‍यादा जंगली जानवरों को बचाया गया है और 30 से ज्‍यादा जानवरों को सफलतापूर्वक दूसरी जगह भेजा गया है. हम इस प्रोजेक्ट को इस भरोसे के साथ आगे बढ़ा रहे हैं कि संरक्षण सिर्फ Government की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समुदाय की भागीदारी भी जरूरी है. हमारा मुख्य लक्ष्य ऐसा माहौल बनाना है जहां जंगल के आसपास रहने वाले किसान बिना किसी डर के अपनी जमीन पर खेती कर सकें.”

डिप्टी सीएम ने आगे कहा, “हमारा मकसद वन्यजीवों को लोगों से अलग करना नहीं है, असली कामयाबी ऐसे भविष्य को बनाने में है जहां लोग और वन्यजीव एक ही जगह पर सुरक्षित रूप से साथ-साथ रह सकें.”

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एएसएच/डीकेपी

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