विश्व उच्च रक्तचाप दिवस : 140/90 से ऊपर बीपी होती है खतरे की घंटी, प्रदूषण भी बढ़ाते हैं ब्लड प्रेशर, हार्टअटैक और स्ट्रोक का खतरा

New Delhi, 16 मई . आज जब हम 17 मई 2026 को 21वां विश्व उच्च रक्तचाप दिवस मना रहे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर साल India में करीब 11 लाख लोग सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं क्योंकि उनके खून का दबाव नसों में हद से ज्यादा होता है. यह सिर्फ एक बीमारी नहीं बल्कि हमारे दौर की सबसे बड़ी ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति’ बन चुकी है.

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस हर साल 17 मई को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसे पहली बार इसी तारीख को साल 2006 में ‘वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग’ (डब्ल्यूएचएल ) द्वारा स्थापित किया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को ‘साइलेंट किलर’ माने जाने वाले उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) के खतरों और बचाव के प्रति जागरूक करना है.

डॉक्टर इसे ‘साइलेंट किलर’ (मूक हत्यारा) कहते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, अगर आपका ब्लड प्रेशर लगातार 140/90 एमएमएचजी या उससे ऊपर रहता है, तो आप इसके शिकार हो चुके हैं. इसका सबसे खतरनाक पहलू यह है कि शुरुआत में इसके कोई लक्षण (जैसे सिरदर्द या चक्कर आना) ही दिखाई नहीं देते.

शायद यही वजह है कि डब्ल्यूएचओ के 2024 की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में हाई बीपी से जूझ रहे करीब 1.4 बिलियन (140 करोड़) वयस्कों में से लगभग 44 प्रतिशत (करीब 60 करोड़ लोग) इस बात से पूरी तरह अनजान रहते हैं. जब तक वे इसके बारे में जानते, तब तक हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक या किडनी फेलियर जैसी नौबत आ चुकी होती है.

डब्ल्यूएचओ कहता है कि दिन भर में 5 ग्राम (एक चम्मच) से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए. हालांकि हमारे चटपटे आहार और पैकेटबंद स्नैक्स नसों में सोडियम का सैलाब ला रहे हैं, जिससे बीपी आसमान छूने लगता है.

घंटों कुर्सी पर बैठे रहना और लगातार बढ़ता मानसिक तनाव हमारे शरीर में ‘कोर्टिसोल’ जैसे स्ट्रेस हार्मोन भर रहा है. हालिया रिसर्च बताती है कि सिर्फ खराब खाना ही नहीं, बल्कि हवा में मौजूद जहरीले कण (पीएम2.5) भी सीधे हमारी नसों को सिकोड़ कर बीपी बढ़ा रहे हैं.

इतनी निराशा के बीच एक अच्छी खबर भी है. हाई बीपी लाइलाज नहीं है. वर्ष 2026 के विश्व उच्च रक्तचाप दिवस की ग्लोबल थीम “एक साथ उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करें” है. इसका सीधा सा मतलब है कि यह लड़ाई अब सिर्फ डॉक्टर की नहीं है. परिवार को साथ मिलकर खाने में नमक कम करना होगा, साथ में टहलने जाना होगा और दवाइयों का नियम बनाना होगा.

India Government की ‘भारतीय उच्च रक्तचाप नियंत्रण पहल’ (आईएचसीआई) ने देश के 100 से ज्यादा जिलों में अब Governmentी केंद्रों पर मरीजों को बिल्कुल मुफ्त और सटीक दवाएं (जैसे एम्लोडिपिन) दी जा रही हैं. इस साल मई के महीने को ‘मई मापन माह’ (एमएमएम) के रूप में मनाया जा रहा है. दिल्ली-एनसीआर में स्वास्थ्य जागरूकता की एक अभूतपूर्व लहर है.

अगर आप दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहे हैं, तो मेट्रो स्टेशनों पर लगे विशेष कियोस्क पर आप मुफ्त में अपना बीपी चेक करा सकते हैं. एम्स, सफदरजंग, मैक्स और सर्वोदय जैसे बड़े अस्पताल मेगा स्क्रीनिंग कैंप लगा रहे हैं, जहां जीवनशैली सुधारने के तरीके सिखाए जा रहे हैं.

वीकेयू/पीएम

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