आंध्र प्रदेश में तीसरे और चौथे बच्चे पर प्रोत्साहन क्यों दे रहे हैं चंद्रबाबू नायडू?

अमरावती, 17 मई . आंध्र प्रदेश के Chief Minister एन चंद्रबाबू नायडू द्वारा तीसरे और चौथे बच्चे के लिए वित्तीय प्रोत्साहन की घोषणा राज्य में लगातार घटती प्रजनन दर (टीएफआर) को लेकर बढ़ती चिंता के बीच की गई है.

श्रीकाकुलम जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए Chief Minister ने घोषणा की कि Government तीसरे बच्चे के लिए 30,000 रुपये और चौथे बच्चे के लिए 40,000 रुपये देगी.

संयुक्त आंध्र प्रदेश में 1995 से 2004 तक Chief Minister रहने के दौरान जनसंख्या नियंत्रण के प्रबल समर्थक रहे चंद्रबाबू नायडू अब मानते हैं कि जनसंख्या बोझ नहीं, बल्कि एक संपत्ति है.

अधिकारियों के अनुसार, दूसरे बच्चे से आगे दिए जाने वाले प्रोत्साहन फ्रांस और हंगरी जैसे देशों के मॉडल से प्रेरित हैं, जहां भविष्य में जनसांख्यिकीय संकट से बचने के लिए ऐसी नीतियां अपनाई गई हैं.

राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक आंध्र प्रदेश India की तुलना में तेजी से वृद्धावस्था की ओर बढ़ रहा है. राज्य की औसत आयु 32.5 वर्ष है, जबकि राष्ट्रीय औसत 28.4 वर्ष है.

अधिकारियों का कहना है कि आंध्र प्रदेश के पास 2040 तक ही जनसांख्यिकीय लाभ की स्थिति बनी रहेगी, इसके बाद बुजुर्ग आबादी का अनुपात तेजी से बढ़ सकता है.

आंध्र प्रदेश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 1993 में 3.0 थी, जो अब घटकर 1.5 रह गई है. यह 2.1 के रिप्लेसमेंट लेवल से काफी नीचे है. अधिकारियों के अनुसार, यह स्थिति विकसित देशों जैसे जापान, दक्षिण कोरिया और इटली की तरह जनसांख्यिकीय संकट की ओर संकेत करती है.

2024 में Chief Minister बनने के बाद से चंद्रबाबू नायडू लगातार जनसंख्या वृद्धि की वकालत कर रहे हैं और टीएफआर को 2.1 तक पहुंचाने को आवश्यक बता रहे हैं.

इसी दिशा में पहला कदम उठाते हुए उनकी Government ने स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए लागू दो-बच्चों की सीमा को समाप्त कर दिया था.

मार्च में उन्होंने देश की पहली ‘पॉपुलेशन मैनेजमेंट पॉलिसी’ पेश की, जिसे जनसंख्या वृद्धि के लिए गेम-चेंजर बताया गया. इस नीति में तीसरे बच्चे के लिए पांच वर्षों तक प्रति माह 1,000 रुपये पोषण सहायता और 18 वर्ष तक मुफ्त शिक्षा जैसी योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं.

Chief Minister ने विधानसभा में कहा था कि Government अधिक बच्चों के जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए 12 महीने का मातृत्व अवकाश और दो महीने का पितृत्व अवकाश देने की योजना बना रही है.

उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि प्रजनन दर में और गिरावट आई तो कार्यशील आबादी कम हो जाएगी, जिससे आर्थिक विकास प्रभावित होगा.

राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण सचिव सौरभ गौर ने कहा था कि अब राज्य उसी समस्या का सामना कर रहा है, जिससे कई विकसित देश जूझ रहे हैं, जहां गैर-कार्यशील आयु वर्ग की आबादी तेजी से बढ़ रही है.

जनसंख्या प्रबंधन नीति के तहत Government ‘मातृत्व’, ‘शक्ति’, ‘क्षेम’, ‘नैपुण्यम’ और ‘संजीवनी’ जैसे पांच चरणों वाली जीवनचक्र प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रही है.

Government ने गर्भावस्था से लेकर वृद्धावस्था तक हर चरण में सहायता देने का आश्वासन दिया है. Chief Minister ने कहा कि निःसंतान दंपतियों और प्रजनन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए Governmentी अस्पतालों में पीपीपी मॉडल के तहत आईवीएफ सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.

स्वास्थ्य विभाग ने प्रजनन चिकित्सा के लिए ‘फर्टिलिटी कॉलेज’ स्थापित करने की योजना भी पेश की है. इन केंद्रों पर विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और निःसंतान दंपतियों को Governmentी सहायता से आईवीएफ उपचार उपलब्ध कराया जाएगा.

Government ने सिजेरियन डिलीवरी की संख्या कम करने और किशोरावस्था में गर्भधारण की दर को मौजूदा 8.8 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य भी तय किया है.

‘स्वर्ण आंध्र विजन 2047’ के तहत ‘पदि सूत्रालु’ (10 सूत्र) में जनसंख्या प्रबंधन और मानव संसाधन विकास को तीसरा प्रमुख सूत्र बनाया गया है, जो जनसंख्या नियंत्रण से जनसंख्या स्थिरता की ओर नीति बदलाव को दर्शाता है.

डीएससी

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