अमेरिका, कनाडा में उइगर समुदाय का विरोध; 2009 के उरुमची हिंसा पर चीन के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई की मांग की

वॉशिंगटन/ओटावा, 6 जुलाई . ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट इन एग्जाइल (ईटीजीई) के अधिकारियों और उइगर समुदाय के सदस्यों ने अमेरिका और कनाडा में प्रदर्शन करते हुए ईस्ट तुर्किस्तान में कथित तौर पर जारी दमन और नरसंहार के लिए चीन को जवाबदेह ठहराने तथा अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की. चीन इस क्षेत्र को शिनजियांग उइगर स्वायत्तशासी क्षेत्र के नाम से संबोधित करता है.

ये प्रदर्शन Sunday को वाशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस और कनाडा के एडमॉन्टन में अल्बर्टा विधानमंडल के बाहर 5 जुलाई 2009 की उरुमची हिंसा की 17वीं बरसी के अवसर पर आयोजित किए गए. ईटीजीई ने इसे शिनजियांग में चीनी अधिकारियों द्वारा किए गए Governmentी दमन की सबसे घातक घटनाओं में से एक बताया.

डिपोर्टेशन अधिकारियों ने बताया कि उइगर समुदायों ने भी जापान और तुर्किए से लेकर नॉर्वे और ब्रिटेन तक, दुनिया भर में स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए. इन आयोजनों में इस दिन को राष्ट्रीय शोक और विरोध दिवस के रूप में मनाते हुए विभिन्न Governmentों से शिनजियांग में चीन की नीतियों के खिलाफ कदम उठाने की अपील की गई.

ईटीजीई के अनुसार, 5 जुलाई 2009 को हजारों उइगरों ने उरुमची में शांतिपूर्ण मार्च निकालकर चीन के शाओगुआन स्थित एक खिलौना फैक्ट्री में मारे गए उइगर मजदूरों के लिए न्याय की मांग की थी.

ईटीजीई ने आरोप लगाया कि इसके जवाब में चीनी अधिकारियों ने गोलीबारी, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और जबरन लोगों को गायब करने जैसी कार्रवाई की. संगठन का दावा है कि इस दौरान सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों उइगर पुरुषों तथा युवाओं को उनके घरों से हिरासत में लेकर लापता कर दिया गया.

ईटीजीई ने आरोप लगाया कि उरुमची नरसंहार Governmentी दमन का एक मिलकर किया गया अभियान था, जिसने उस नरसंहार का संकेत दिया जो अब अपने तेरहवें साल में प्रवेश कर रहा है.

इसमें आगे कहा गया, “लाखों उइगर, कजाख, किर्गिज और दूसरे तुर्क लोगों को तब से कॉन्सेंट्रेशन कैंप और जेलों में कैद कर दिया गया है, उनसे जबरदस्ती काम करवाया गया और उनकी बुनियादी आजादी छीन ली गई है. दस लाख से ज्यादा पूर्वी तुर्किस्तानी बच्चों को उनके परिवारों से अलग करके चीनी Governmentी संस्थानों में रखा गया है, जिन्हें उनकी भाषा, धर्म और पहचान मिटाने के लिए बनाया गया है.”

व्हाइट हाउस के बाहर आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए, यह कार्यक्रम अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका की स्वतंत्रता के 250 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दिए गए भाषण के एक दिन बाद हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था, “स्वतंत्रता के उद्देश्य की जय हो!”

इस अवसर पर ईस्ट तुर्किस्तान निर्वासित Government (ईटीजीई) के विदेश मंत्री सालिह हुदायर ने कहा, “दुनिया के सभी देशों में अमेरिका सबसे बेहतर समझ सकता है कि उस साम्राज्य के खिलाफ स्वतंत्रता के लिए लड़ने का क्या मतलब होता है, जो कहता है कि आपको अस्तित्व में रहने का कोई अधिकार नहीं है. यदि चीन को नरसंहार जैसे अपराधों के बावजूद बिना जवाबदेही के छोड़ दिया गया, तो वह हमारी सीमाओं तक ही नहीं रुकेगा. चीन के साम्राज्यवादी विस्तार का मुकाबला करने के लिए स्वतंत्र दुनिया को उन सभी देशों की आजादी का समर्थन करना चाहिए, जिन्हें उसने अपने नियंत्रण में रखा है. हमारी आजादी और आपकी सुरक्षा एक ही उद्देश्य से जुड़ी हुई हैं.”

उधर, कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के एडमॉन्टन में ईस्ट तुर्किस्तान निर्वासित Government (ईटीजीई) के Prime Minister अब्दुलाहत नूर ने समानांतर प्रदर्शन का नेतृत्व किया. नूर अल्बर्टा उइगर सांस्कृतिक सोसायटी के अध्यक्ष भी हैं.

नूर ने कहा, “कनाडा को केवल औपचारिक बयानों से आगे बढ़ते हुए ईस्ट तुर्किस्तान को एक कब्जे वाले देश के रूप में मान्यता देनी चाहिए. हम ओटावा से अपील करते हैं कि वह हमारे लोगों के आत्मनिर्णय और स्वतंत्रता के अधिकार का समर्थन करे.”

ईटीजीई ने अमेरिका, कनाडा और अन्य देशों की Governmentों से अपील की कि वे शिनजियांग के लोगों की समस्याओं के मूल कारणों का समाधान करें. संगठन ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इस क्षेत्र को कब्जे वाला देश घोषित करने और वहां के लोगों के आत्मनिर्णय तथा स्वतंत्रता के अधिकार का समर्थन करने की भी मांग की.

संगठन ने वैश्विक समुदाय से चीन के हाल में लागू किए गए “एथनिक यूनिटी लॉ” को अस्वीकार करने, चीनी अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह ठहराने तथा “ईस्ट तुर्किस्तान के संबंध में उपनिवेशित देशों और लोगों को स्वतंत्रता प्रदान करने” संबंधी संयुक्त राष्ट्र घोषणा के समर्थन की भी अपील की.

केके/एएस

Leave a Comment