
New Delhi, 30 दिसंबर . त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की देहरादून में हत्या का मामला तूल पकड़ा हुआ है. इस बीच Chief Minister पुष्कर सिंह धामी ने चकमा के पीड़ित पिता से फोन पर बात की, जिसको लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है कि इस बातचीत को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए. इस बीच कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने Tuesday को भाजपा पर निशाना साधा.
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने से बात करते हुए कहा, “एक पिता, जिसने अपनी पूरी जिंदगी देश की सेवा में लगन और मेहनत से बिताई, आज अपने बेटे के बिना रह गया है. ऐसे दुखद और संवेदनशील पल में, अगर किसी राज्य का Chief Minister उनसे बात कर रहा है, तो यह एक निजी बातचीत होनी चाहिए थी. एक दुखी पिता, फोन पर बात करते हुए, सांत्वना ढूंढ रहा था, लेकिन उसकी गुहार को टीवी कवरेज, टीआरपी और Chief Minister की पब्लिसिटी का जरिए बना दिया गया, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.”
उन्होंने कहा, “इस मामले में Police प्रशासन की भूमिका बहुत दुखद है. उसकी मौत 9 दिसंबर को हुई थी, और शिकायत 10 दिसंबर को दर्ज की गई थी, फिर भी First Information Report 10-11 दिन बाद ही दर्ज की गई. तब तक मुख्य आरोपी शायद भाग चुका होगा. First Information Report उत्तराखंड में त्रिपुरा के छात्र समुदाय के दबाव के बाद ही दर्ज की गई. मुझे उम्मीद थी कि Police बताएगी कि First Information Report दर्ज करने में इतनी देरी क्यों हुई और मुख्य आरोपी कैसे भागने में कामयाब रहा. इन सवालों का जवाब देने के बजाय, मामले को नस्लीय रंग दिया गया है. ऐसा लगता है कि उत्तराखंड के Chief Minister भी सच्चाई और न्याय की तलाश करने के बजाय अपनी छवि को लेकर ज्यादा चिंतित हैं.”
कांग्रेस सांसद ने कहा, “उत्तराखंड को देवताओं की भूमि माना जाता है, लेकिन अगर आप वहां जाएंगे, तो देखेंगे कि कानून-व्यवस्था की स्थिति कितनी खराब हो गई है. बाजारों में गैंग और गुंडागर्दी बढ़ गई है. ऐसे समय में जब Government को पूरे देश को हिला देने वाले मामले में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी, वे अपनी इमेज को लेकर ज्यादा चिंतित दिखे. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.”
गोगोई ने कहा, “हम इस मुद्दे को सदन में जरूर उठाएंगे, क्योंकि देश के हर नागरिक को यह सुनने की जरूरत है. यह बहुत परेशान करने वाली बात है कि हमारे अपने देश में, नागरिक अलग-अलग इलाकों में खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं. क्या उन्हें नागरिक नहीं माना जाता? क्या लोगों को अपने ही देश के दूसरे राज्यों की स्थितियों, भाषाओं और विविधता के बारे में नहीं पता? यह बहुत चिंता और दुख की बात है.”
उन्होंने कहा, “मैं पूछना चाहता हूं कि बिहार में कितने घुसपैठिए मिले, क्योंकि वहां इसका ज़िक्र किया गया था. Jharkhand में भी कितने मिले? मैं जानना चाहता हूं कि वे इन सवालों का जवाब क्यों नहीं दे सकते.”
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एससीएच/डीएससी