आदिवासी समुदाय को शिक्षा, कौशल और आत्मनिर्भरता अपनाना चाहिए: जिष्णु देव वर्मा

Mumbai , 9 जून . Maharashtra के Governor जिष्णु देव वर्मा ने Tuesday को आदिवासी समुदाय से शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और आत्मनिर्भरता के माध्यम से प्रगति हासिल करके राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया.

वे आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की 126वीं शहादत वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.

Governor वर्मा ने कहा कि महज 25 साल के छोटे से जीवन में बिरसा मुंडा ने सामाजिक, सांस्कृतिक और Political जागृति लाई. अंधविश्वास, व्यसन, सामाजिक बुराइयों और विभाजनकारी शक्तियों के खिलाफ उनका संघर्ष आज भी लोगों को प्रेरित करता है.

Governor ने कहा कि केंद्र और राज्य Governmentें दोनों ही आदिवासी समुदायों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं और Prime Minister Narendra Modi की आदिवासी कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता ने आदिवासी समुदायों को शिक्षा, रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्रों में आगे बढ़ने में सक्षम बनाया है. शिक्षा ही वह सबसे बड़ी शक्ति है जो किसी व्यक्ति को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाती है.

उन्होंने कहा कि राज्य Government आदिवासी छात्रों के लिए मुफ्त छात्रावास, भोजन और अन्य सुविधाएं प्रदान करती है. इसके साथ ही अभिभावकों को अपने बच्चों, विशेषकर लड़कियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.”

भारतीय इतिहास में गोंडवाना साम्राज्य और उसके शासकों की गौरवशाली विरासत की प्रशंसा करते हुए Governor वर्मा ने कहा कि आदिवासी समुदायों को शिक्षा, कौशल विकास और आर्थिक समृद्धि के माध्यम से उस गौरव को पुनः प्राप्त करना चाहिए.

उन्होंने समाज से कुपोषण, बीमारी और नशे की लत को खत्म करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया.

Governor ने बताया कि जनजातीय विकास विभाग को जनजातीय कला, नृत्य और संगीत के संरक्षण के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है.

उन्होंने यह भी कहा कि जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरटीआई) को देश भर के आदिवासी समुदायों के इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और ज्ञान प्रणालियों का दस्तावेजीकरण करने का निर्देश दिया गया है.

Chief Minister देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महान क्रांतिकारी नेता बिरसा मुंडा ने अपने 25 साल के संक्षिप्त जीवनकाल में ही ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी थी. उनका बलिदान आदिवासी समुदायों को आत्मसम्मान, संघर्ष और देशभक्ति के मूल्यों से प्रेरित करता रहता है.

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे समय में जब ब्रिटिश शासन के तहत पानी, जंगलों और जमीन पर आदिवासी अधिकारों को छीना जा रहा था, बिरसा मुंडा ने अन्याय के खिलाफ एक क्रांति को जन्म दिया. उनके नेतृत्व वाले आंदोलन ने औपनिवेशिक शासन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश की. सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व करने के अलावा, उन्होंने आदिवासी समुदायों को एकजुट और जागृत भी किया.

उन्होंने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और कल्याणकारी पहलों के माध्यम से आदिवासी समुदायों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए राज्य Government की प्रतिबद्धता को दोहराया. उन्होंने आगे कहा कि ये सभी प्रयास बिरसा मुंडा के संघर्ष, दृढ संकल्प और बलिदान से प्रेरित हैं.

एसएके/डीकेपी

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