होर्मुज संकट के बीच नहीं हुई ईंधन की किल्लत, पूर्व राजनयिक ने बताया कैसे सरकार ने समझदारी से लिया काम

अमृतसर, 29 जून . होर्मुज संकट के दौरान भी India में ईंधन की आपूर्ति बनी रही. बिना किसी आपातकालीन प्रतिबंध के जारी रहने का आखिर कारण क्या था? पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी ने इसके बारे में बताया है. उन्होंने इसके लिए Government की रणनीति की सराहना की. उन्होंने कहा कि जहां कई देशों में ईंधन संकट, लंबी कतारें और पाबंदियां देखने को मिलीं, वहीं India ने स्थिति को समझदारी और दूरदर्शिता के साथ संभाला.

नवदीप सूरी ने कहा, “अलग-अलग देशों में ईंधन की कीमत तय करने के अलग-अलग तरीके होते हैं. कुछ देशों में कीमतें सीधे वैश्विक बाजार से जुड़ी होती हैं, जबकि India एक नियंत्रित मूल्य प्रणाली अपनाता है. उन्होंने बताया कि 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद जब कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं, तब Government ने बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा खुद वहन किया. तेल कंपनियों ने भी अपने मुनाफे में कटौती की और Government ने करों में राहत देकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखा.”

उन्होंने कहा कि जब कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, तब भी Government ने अधिकांश अतिरिक्त बोझ खुद उठाया. इसी वजह से भारतीय नागरिकों को उन आपातकालीन ईंधन प्रतिबंधों का सामना नहीं करना पड़ा, जो कई अन्य देशों में लागू किए गए थे.

होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने को वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए सबसे खराब स्थिति बताते हुए सूरी ने कहा, “India अपनी करीब 90 प्रतिशत जीवाश्म ईंधन जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है और इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. इसके बावजूद Government ने समय रहते तैयारी कर ली थी.”

उन्होंने कहा कि Government की सक्रिय ऊर्जा कूटनीति ने इस संकट से निपटने में अहम भूमिका निभाई. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी स्वयं पूर्व राजनयिक हैं, इसलिए उनकी समझ और अनुभव का बड़ा लाभ मिला. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब और कतर जैसे देशों के साथ India के मजबूत संबंध भी इस दौरान बेहद उपयोगी साबित हुए. Prime Minister की यूएई यात्रा और युद्ध के दौरान पेट्रोलियम मंत्री की कतर यात्रा ने भी द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूती देने का संदेश दिया.

सूरी ने बताया कि India ने यूएई, अमेरिका और अफ्रीका व लैटिन अमेरिका के नए बाजारों से भी ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की. साथ ही देश के भीतर मांग को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया गया.

उन्होंने कहा कि यदि Pakistan जैसे देशों से तुलना करें, जहां स्कूल बंद करने पड़े, चार दिन का कार्य सप्ताह लागू करना पड़ा और गंभीर ईंधन संकट देखने को मिला, तो India में स्थिति काफी सामान्य रही. उन्होंने बताया कि अमृतसर में उन्हें केवल एक दिन अफवाहों के कारण पेट्रोल पंपों पर भीड़ दिखाई दी. एलपीजी की कमी भी केवल दो-तीन दिन रही और फिर स्थिति सामान्य हो गई.

उन्होंने कहा कि Government ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी सिलेंडर की रीफिल पर 25 दिन का अंतराल तय किया, जो अधिकांश परिवारों के लिए पर्याप्त था. कुल मिलाकर, उनके अनुसार India की पूरी व्यवस्था ने इस चुनौतीपूर्ण दौर में काफी प्रभावी ढंग से काम किया.

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केआर/

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