तेलंगाना की धरती संघर्षों की जन्मभूमि, जन सेना पार्टी यहीं की उपज : पवन कल्याण

अमरावती, 2 जून . हैदराबाद में जनसभा आयोजित करने की अनुमति तेलंगाना Police द्वारा खारिज किए जाने के अगले ही दिन जनसेना प्रमुख व आंध्र प्रदेश के उपChief Minister पवन कल्याण का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि जनसेना का जन्म तेलंगाना की पावन धरती पर हुआ है. इसी मिट्टी से पार्टी को संघर्ष की प्रेरणा और विरासत मिली है, जिसे पार्टी ने पूरी तरह आत्मसात किया है.

Tuesday को तेलंगाना स्थापना दिवस के अवसर पर तेलंगाना के लोगों को बधाई देते हुए, उन्होंने कहा कि जन सेना पार्टी तेलंगाना के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने उनके आत्म-सम्मान को बनाए रखने और उनके समग्र विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में पूरी निष्ठा के साथ काम करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.

Actor-राजनेता ने यह भी घोषणा की कि वह Tuesday शाम को हैदराबाद स्थित अपने आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे.

उन्होंने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “मैं आज शाम 4.30 से 5.30 बजे के बीच जुबली हिल्स स्थित अपने घर पर एक प्रेस-मीट को संबोधित करूंगा. मुझे उम्मीद है कि तेलंगाना Police विभाग कम से कम मुझे जेएसपी नेताओं के साथ प्रेस-मीट करने की अनुमति देगा. देखते हैं…”

साइबराबाद Police ने Tuesday को तेलंगाना स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली पवन कल्याण की ‘तेलंगाना नव निर्माण संकल्प सभा’ ​​के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया. Police ने इसके पीछे कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए ‘काफी खतरा’ होने का हवाला दिया.

Police ने कहा कि प्रस्तावित बैठक आयोजित करने की अनुमति का अनुरोध कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति व सौहार्द सुनिश्चित करने के लिए खारिज कर दिया गया.

इस बीच, एक अन्य social media पोस्ट में, पवन कल्याण ने कहा कि तेलंगाना का जन्म एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है – यह दशकों की जन आकांक्षाओं, आत्म-सम्मान के लिए संघर्ष और भारी बलिदानों का परिणाम है. मैं उन कार्यकर्ताओं, छात्रों, बुद्धिजीवियों, कलाकारों, कर्मचारियों, किसानों और शहीदों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने तेलंगाना को साकार करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया.

उन्होंने कहा कि अपनी आवाज उठाने का साहस तेलंगाना के भीतर ही बसता है, चाहे वह वंचितों के कल्याण के लिए हो, युवाओं की आकांक्षाओं के लिए हो, या व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर किसी भी अतिक्रमण के खिलाफ हो.

उन्होंने कहा, “ऐसी विशेषता जन सेना के कार्यकर्ताओं में भी भरपूर मात्रा में मौजूद है. मैं तेलंगाना राज्य के उत्कृष्ट विकास की कामना करता हूं- एक ऐसी भूमि जहां शानदार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत फलती-फूलती है. मैं उन प्रत्येक व्यक्ति को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने तेलंगाना के उद्देश्य के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया.” जन सेना नेता ने कहा कि तेलंगाना एक ऐसा राज्य है जो 3.5 करोड़ लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं, और इसके युवाओं के बलिदानों के माध्यम से साकार हुआ है.

उन्होंने कहा, “एक अलग राज्य के रूप में अपनी स्थापना के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, मैं तेलंगाना के सभी लोगों को अपनी हार्दिक बधाई देता हूं. तेलंगाना की धरती संघर्षों की जन्मभूमि है. यहां की हवा में ही वीरता बसी है; इसके पानी में आंदोलनों की धाराएं बहती हैं; और इसकी मिट्टी में शहीदों का पवित्र खून समाया है. सम्मक्का और सरलम्मा की प्रेरणादायक भावना से लेकर कोमाराम भीम जैसे महान नायकों के बलिदानों तक, यह धरती आत्म-सम्मान और न्याय के लिए अटूट संघर्ष का एक शाश्वत प्रतीक बनकर खड़ी है. अपनी समृद्ध भाषा, संस्कृति, परंपराओं, लोक कलाओं और साहित्यिक विरासत के साथ, तेलंगाना India की जीवंत विविधता के बीच एक अद्वितीय और विशिष्ट स्थान रखता है.”

उप-Chief Minister ने कहा कि लंबे समय से, तेलंगाना के समाज के सामने आने वाली गंभीर चुनौतियों को लेकर उनके मन में गहरी पीड़ा थी, जिसके साथ ही जिम्मेदारी का भी गहरा एहसास जुड़ा था.

उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा फ्लोरोसिस से प्रभावित क्षेत्रों की दुर्दशा, आदिवासी समुदायों के अधिकारों, किसानों के संघर्षों, बेरोजगार युवाओं की आकांक्षाओं और शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों की चुनौतियों को केवल Political मुद्दों के तौर पर नहीं, बल्कि मुख्य रूप से मानवीय सरोकारों के तौर पर देखा है. मेरा दृढ़ विश्वास है कि लोगों को जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, चाहे वे किसी भी क्षेत्र में रहते हों, वे हम सभी की साझा और सामूहिक जिम्मेदारी हैं.”

उन्होंने कहा कि तेलंगाना राष्ट्रीय मंच पर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है, जिनमें आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, औद्योगिक विकास, स्टार्टअप इकोसिस्टम और शिक्षा शामिल हैं. हालांकि, सच्चा विकास तब तक अधूरा रहता है, जब तक उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक न पहुंच जाए. उन्होंने कहा, “हमारा सामूहिक उद्देश्य एक ऐसा तेलंगाना बनाना होना चाहिए, जहां ग्रामीण क्षेत्र, आदिवासी बस्तियां, पिछड़े वर्ग, महिलाएं, युवा और छोटे किसान, सभी समान अवसरों के साथ आगे बढ़ सकें.”

एससीएच

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