
वाशिंगटन, 14 मई . Pakistan और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच राजनयिक तनाव अब महज छोटी-मोटी रुकावट नहीं लगता, बल्कि द्विपक्षीय साझेदारी को हुआ नुकसान अब स्थायी प्रतीत होता है. एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि दोनों देशों के रिश्तों की जो नींव कभी भरोसे पर टिकी थी—और जिसकी बुनियाद इस उम्मीद पर थी कि मुश्किल घड़ी में Pakistan अबू धाबी का साथ देगा—वह भरोसा अब टूटता नजर आ रहा है.
अमेरिका स्थित थिंक टैंक, मिडिल ईस्ट फोरम के अनुसार, यूएई ने आर्थिक संकटों में लंबे समय से Pakistan का समर्थन किया है और Pakistanी श्रमिकों के लिए एक प्रमुख गंतव्य बना हुआ है, साथ ही चेतावनी दी है कि संबंधों में किसी भी प्रकार की दीर्घकालिक गिरावट Pakistan की आर्थिक कमजोरियों को बढ़ाएगी.
खबरों के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात ने Pakistan से 35 लाख अमेरिकी डॉलर का कर्ज चुकाने को कहा, जिसे इस्लामाबाद सऊदी अरब के समर्थन से ही चुका पाया. इसके बाद, अमीराती अधिकारियों ने लगभग 15,000 Pakistanी नागरिकों को देश से निकाल दिया, जबकि एतिहाद एयरवेज ने कई कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया और उन्हें 48 घंटों के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया. रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से प्रत्येक घटना ने द्विपक्षीय संबंधों की दिशा पर सवाल खड़े किए, लेकिन ये सभी घटनाक्रम मिलकर संबंधों में गंभीर गिरावट का संकेत देते हैं.
मध्य पूर्व फोरम की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है, “इस तरह का संकट लंबे समय से अपेक्षित था. दशकों से Pakistan और संयुक्त अरब अमीरात के बीच गहरे रणनीतिक, आर्थिक और जन-संबंध रहे हैं. संयुक्त अरब अमीरात फारस की खाड़ी में Pakistan के सबसे करीबी साझेदारों में से एक था, जिसने आर्थिक अस्थिरता के दौर में बार-बार वित्तीय सहायता प्रदान की, प्रमुख क्षेत्रों में निवेश किया और लाखों Pakistanी प्रवासी कामगारों को शरण दी, जिनकी भेजी गई रकम Pakistan की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गई.”
इसमें आगे कहा गया है, “सैन्य सहयोग, खुफिया समन्वय और श्रम प्रवासन ने साझेदारी को मजबूत किया, जिसमें दोनों देशों के नेता नियमित रूप से एक-दूसरे को ‘भाईचारे वाले राज्य’ बताते थे. यह साझेदारी सितंबर 2025 में Pakistan द्वारा सऊदी अरब के साथ एक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद टूटनी शुरू हुई, जिसमें एक पर हमला दोनों पर हमला माना जाता है. Pakistan के इस कदम से अबू धाबी नाराज हो गया, जिसकी रियाद के साथ प्रतिद्वंद्विता सऊदी समर्थित बलों द्वारा दक्षिणी यमन में घुसपैठ के बाद चरम पर पहुंच गई.”
रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि ईरान के साथ खाड़ी अरब देशों के तनाव ने दोनों पक्षों के बीच दूरियां और बढ़ा दी हैं. अमीरातियों का मानना है कि हालिया संघर्ष के दौरान और उसके बाद Pakistan ने ईरान के प्रति सहानुभूति दिखाई. Pakistan को वर्षों से मिल रही अमीराती वित्तीय सहायता को देखते हुए अबू धाबी को इस्लामाबाद से, विशेष रूप से ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच, मजबूत राजनयिक संबंध की उम्मीद थी.
रिपोर्ट में कहा गया है, “यह तथ्य है कि अमीरातियों का मानना था कि Pakistan ने शांति वार्ता के दौरान उनकी चिंताओं का पर्याप्त रूप से समाधान नहीं किया, इससे असंतोष की भावना और बढ़ गई. खाड़ी अरब देशों द्वारा स्वयं ईरानी नाकाबंदी का सामना करने के बावजूद Pakistan द्वारा ईरान में छह जमीनी मार्ग खोलने के निर्णय ने समस्या को और जटिल बना दिया. अमीराती रणनीतिक टिप्पणियां Pakistan के साथ बढ़ते तनाव को दर्शाती हैं.”
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डीकेपी/