
हैदराबाद, 14 अप्रैल . तेलंगाना के Chief Minister रेवंत रेड्डी ने केरल के Chief Minister पिनाराई विजयन को पत्र लिखकर Lok Sabha सीटों को प्र-राटा मॉडल से बढ़ाने के प्रस्ताव का संयुक्त रूप से विरोध करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव दक्षिणी राज्यों के हितों के लिए अत्यंत नुकसानदायक और देश के संघीय संतुलन के खिलाफ हो सकता है.
अपने पत्र में रेवंत रेड्डी ने कहा कि Lok Sabha सीटों की संख्या बढ़ाकर प्र-राटा पद्धति से तय करने का विचार गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे दक्षिणी राज्यों और पूरे देश के संघीय ढांचे पर बड़ा असर पड़ेगा.
उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर तीन अलग-अलग विषय ‘महिला आरक्षण, राष्ट्रीय परिसीमन (डीलिमिटेशन) और Lok Sabha सीटों की संख्या में वृद्धि’ को मिलाकर जनता के बीच भ्रम पैदा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वे महिलाओं के आरक्षण के समर्थन में हैं, लेकिन सीटों की संख्या बढ़ाए बिना इसका क्रियान्वयन होना चाहिए.
Chief Minister ने कहा कि सबसे विवादित मुद्दा Lok Sabha सीटों की संख्या को लगभग 850 तक बढ़ाना और उसे प्र-राटा आधार पर लागू करना है, जिसका वे पूरी तरह विरोध करते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इस मॉडल से राज्यों के बीच Political संतुलन और अधिक बिगड़ जाएगा, जहां केरल की सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी, वहीं उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं.
उन्होंने कहा कि इससे दक्षिणी राज्यों की Political शक्ति सापेक्ष रूप से कम हो जाएगी, जबकि इन राज्यों का देश के विकास में योगदान लगातार बढ़ रहा है.
रेवंत रेड्डी ने अपने पत्र में यह भी कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन इस मॉडल में इन उपलब्धियों को प्रतिनिधित्व तय करने में कोई महत्व नहीं दिया जाएगा.
उन्होंने वित्तीय संसाधनों के वितरण में असमानता का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ राज्यों को उनके योगदान की तुलना में अधिक धन मिलता है, जबकि दक्षिणी राज्यों को अपेक्षाकृत कम हिस्सा मिलता है.
Chief Minister ने सुझाव दिया कि इस स्थिति से बचने के लिए एक ‘हाइब्रिड मॉडल’ अपनाया जा सकता है, जिसमें नई सीटों का आधा हिस्सा प्र-राटा आधार पर और बाकी आधा हिस्सा आर्थिक योगदान और विकास मानकों के आधार पर तय किया जाए.
उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रस्ताव है, जिसे आगे चर्चा और विचार-विमर्श के बाद और बेहतर बनाया जा सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा और सभी राज्यों को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा.
रेवंत रेड्डी ने अंत में कहा कि दक्षिणी राज्यों और समान विचारधारा वाले राज्यों को इस मुद्दे पर एकजुट होकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए.
–
एएमटी/डीएससी