‘सुदर्शन पटनायक’, रेत पर मूर्ति उकेर, दिखाते हैं अपनी कला का पर्दशन

New Delhi, 14 अप्रैल . विश्व विख्यात रेत कलाकार (सैंड आर्टिस्ट) सुदर्शन Patnaयक का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है. Odisha की सुनहरी रेत पर अपनी उंगलियों से जादू उकेरने वाले सुदर्शन ने न केवल इस कला को वैश्विक पहचान दिलाई, बल्कि इसे सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी बनाया.

सुदर्शन Patnaयक का जन्म 15 अप्रैल 1977 को Odisha के पुरी जिले में हुआ. उनका बचपन घोर आर्थिक तंगी में बीता. गरीबी के कारण वे अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए और उन्हें दूसरों के घरों में काम करना पड़ा. लेकिन कहते हैं न कि हुनर को कोई नहीं रोक सकता; उन्होंने पुरी के समुद्र तट पर रेत से आकृतियां बनाना शुरू किया. उनके पास न कागज था, न रंग, इसलिए उन्होंने विशाल समुद्र तट को ही अपना कैनवास बना लिया.

Patnaयक ने अपनी मेहनत से रेत कला को एक नई ऊंचाई दी. उनके नाम कई विश्व रिकॉर्ड दर्ज हैं, जिनमें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी शामिल है. 2017 में उन्होंने पुरी बीच पर 48 फीट ऊंचा दुनिया का सबसे ऊंचा रेत का महल बनाया था. हाल ही में उन्होंने पुरी के नीलाद्रि बीच पर लगभग 1.5 टन सेब और रेत का उपयोग करके दुनिया की सबसे बड़ी ‘सांता क्लॉज’ की आकृति बनाई, जिसे ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बुक ऑफ इंडिया’ में जगह मिली.

उनके खाते में अंतर्राष्ट्रीय सम्मान भी शामिल है. उन्होंने इटली में ‘इटैलियन गोल्डन सैंड आर्ट अवार्ड 2019’ जीतकर इतिहास रचा. वे इस पुरस्कार को पाने वाले पहले भारतीय हैं. उन्होंने रूस में भी सफलता के झंडे गाड़े. 2024 में उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग, रूस में भगवान जगन्नाथ की 12 फीट ऊंची प्रतिमा के लिए ‘गोल्डन सैंड मास्टर अवार्ड’ जीता. रूस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में सुदर्शन Patnaयक को ‘गोल्डन सैंड मास्टर्स’ अवार्ड से सम्मानित किया गया.

सुदर्शन Patnaयक को 2014 में India Government ने पद्म श्री से नवाजा, जो देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है.

हाल ही में, वे प्रतिष्ठित फ्रेड डैरिंगटन सैंड मास्टर अवार्ड (2025) जीतने वाले पहले भारतीय बने. उन्होंने 27 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम किए हैं.

पद्म पुरस्कार से सम्मानित और प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन Patnaयक ने हाल ही में Odisha के पुरी बीच पर एक भव्य रेत की मूर्ति बनाकर दिग्गज गायिका आशा भोसले को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

इस मनमोहक रेत की मूर्ति पर एक मार्मिक संदेश अंकित किया, “आशा ताई को श्रद्धांजलि—आपकी आवाज हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेगी.”

एमएस/

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