डिब्रूगढ़ के चाय मजदूर बोले- सरकारी योजनाओं से मिला फायदा, अब चाहिए 500 रुपए दैनिक मजदूरी

डिब्रूगढ़, 12 मार्च . आगामी असम विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की चुनावी राजनीति में चाय बागान समुदाय की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है. असम की कुल लगभग 3.3 करोड़ आबादी में से करीब एक करोड़ लोग चाय बागान समुदाय से जुड़े हैं, जो राज्य की राजनीति और चुनावी समीकरणों में अहम प्रभाव रखते हैं.

डिब्रूगढ़ के चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों और किसानों ने Government की कई योजनाओं और कल्याणकारी कदमों की सराहना की है. हालांकि इसके साथ ही उन्होंने कुछ अहम मांगें भी सामने रखी हैं. समुदाय के लोगों का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन 500 रुपए की मजदूरी, राजनीति में ज्यादा प्रतिनिधित्व और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिया जाना चाहिए.

स्थानीय किसानों और चाय बागान मजदूरों का कहना है कि हाल के वर्षों में Government की योजनाओं से कुछ सुधार जरूर देखने को मिला है. एक किसान ने से कहा कि हिमंता बिस्वा सरमा और पीएम मोदी की Governmentों ने कई सुविधाएं दी हैं, जिनका फायदा लोगों तक पहुंच रहा है.

एक अन्य किसान ने बताया कि कुछ चाय बागानों में सर्वेक्षण भी चल रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सर्वे सही तरीके से पूरा होगा. अगर यह सर्वे ठीक से पूरे हो जाएं तो हमें बहुत खुशी होगी.

वहीं एक अन्य किसान ने बताया कि राज्य Government द्वारा चाय बागानों में दी जा रही सुविधाओं का असर रोजगार के अवसरों पर भी पड़ा है. उनके मुताबिक, स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कई नए रोजगार पैदा हुए हैं.

एक अन्य किसान ने कहा, “Chief Minister हिमंता बिस्वा सरमा की Government ने चाय बागानों में जो सुविधाएं दी हैं, उससे मेडिकल सेक्टर में भी कई नौकरियां पैदा हुई हैं.”

Political विश्लेषकों का मानना है कि असम में चाय बागान समुदाय की बड़ी आबादी होने के कारण आने वाले विधानसभा चुनाव में यह वर्ग एक निर्णायक वोट बैंक साबित हो सकता है. इसलिए विभिन्न Political दल इस समुदाय की मांगों और समस्याओं पर खास ध्यान दे रहे हैं.

वीकेयू/एएस

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