
New Delhi, 17 जुलाई . राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने Friday को केंद्र Government पर तीखा हमला बोला. उन्होंने सोनम वांगचुक के जारी विरोध-प्रदर्शन की अनदेखी करने को लेकर Government को बेहद असंवेदनशील बताया.
Friday को वह सोनम वांगचुक और कार्यकर्ता अभिजीत दिपके के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचीं. उन्होंने स्वास्थ्य को देखते हुए वांगचुक से आमरण अनशन समाप्त करने की अपील की. सुले ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले की कड़ी निंदा की और इसे देशभर के लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाला अपराध बताया.
सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि वांगचुक देश के लिए एक अनमोल व्यक्ति हैं. Government पूरी तरह से असंवेदनशीलता दिखा रही है. सत्ता पक्ष के किसी व्यक्ति को उनसे बात करने के लिए पहुंचना चाहिए था, लेकिन किसी ने भी आने की जहमत नहीं उठाई. नीट में हुई अनियमितताएं कोई अकेली घटना नहीं हैं, बल्कि यह पूरे देश के लाखों निर्दोष बच्चों के साथ किया गया गंभीर अन्याय है.
सुले ने कहा कि वांगचुक और युवा कार्यकर्ता अभिजीत दिपके के समर्थन में उनके फैसले को उनके अपने क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने सराहा और समर्थन दिया. उन्होंने वांगचुक से स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन खत्म करने का अनुरोध किया, लेकिन साथ ही कहा कि वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और केंद्र Government के साथ बातचीत की अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं.
देश के अन्य Political मुद्दों पर बात करते हुए सुले ने प्रस्तावित विधायी बदलावों को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि विपक्ष संविधान संशोधन विधेयक के मौजूदा प्रारूप का कड़ा विरोध करता है. इस विधेयक पर व्यापक बहस और चर्चा की जरूरत है. हम इसके मौजूदा स्वरूप में लागू किए जाने के पूरी तरह खिलाफ हैं.
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि इस पर अभी चर्चा जारी है. परिसीमन विधेयक को लेकर चर्चा करना तब तक जल्दबाजी होगी, जब तक इसका आधिकारिक मसौदा पेश नहीं किया जाता.
Lucknow में उत्तर प्रदेश के Chief Minister योगी आदित्यनाथ से अपनी हालिया मुलाकात का बचाव करते हुए सुप्रिया सुले ने संघीय व्यवस्था को लेकर व्यावहारिक रुख अपनाया. उन्होंने कहा, “हम जनता के प्रतिनिधि हैं. जनता के काम के लिए अलग-अलग दलों के मंत्रियों से मिलना एक सामान्य जरूरत है.”
सुले ने पार्टी में विभाजन के बाद पवार परिवार के बीच Political समझौते की चल रही चर्चाओं पर भी बात की. उन्होंने बताया कि उनके दिवंगत भाई अजित पवार चाहते थे कि परिवार और दोनों अलग हुए गुट फिर से एक साथ आकर देश की सेवा करें.
उन्होंने कहा, “यह मेरे भाई की आखिरी इच्छा थी और यह प्रस्ताव पूरी तरह उनकी तरफ से आया था. परिवार के तौर पर हमने उनकी आखिरी इच्छा पूरी करने की पूरी कोशिश की. हालांकि, दूसरी तरफ से आए जवाब और सार्वजनिक बयानों से साफ हो गया कि वे साथ आने के इच्छुक नहीं हैं. अब जब मेरे भाई नहीं रहे हैं, तो हम इस चर्चा को खत्म कर रहे हैं. यह अध्याय आधिकारिक रूप से बंद हो चुका है.”
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एएमटी/एबीएम