Supreme Court ने मेडिकल पैरोल बढ़ाने की मांग ठुकराई, आसाराम को जेल लौटने का निर्देश

jaipur, 27 अक्टूबर . Supreme Court ने आसाराम की मेडिकल पैरोल बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी है और उन्हें मौजूदा अवधि समाप्त होने पर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है. उन्हें Tuesday शाम तक आत्मसमर्पण करना होगा.
आसाराम Rajasthan में 2013 के नाबालिग से बलात्कार मामले में जोधपुर की केंद्रीय जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं. जोधपुर की एक अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था.
Rajasthan उच्च न्यायालय ने उन्हें 6 अक्टूबर को 20 दिनों की पैरोल दी थी, जो अब समाप्त हो रही है. उनके वकील ने मेडिकल आधार पर पैरोल बढ़ाने के लिए Supreme Court का रुख किया था. याचिका के अनुसार, आसाराम Madhya Pradesh के उज्जैन स्थित Governmentी धनवंतरी आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज करा रहे हैं.
उनके वकील ने दलील दी कि उनका इलाज जारी है और चिकित्सकीय आधार पर अतिरिक्त समय का अनुरोध किया. सर्वोच्च न्यायालय ने पैरोल की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया, हालांकि Rajasthan Government को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि आसाराम की चिकित्सा संबंधी जरूरतों का पर्याप्त ध्यान रखा जाए.
सर्वोच्च न्यायालय ने आसाराम की चिकित्सीय पैरोल बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी और उन्हें Tuesday शाम 5 बजे तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया, क्योंकि उनकी पैरोल की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी है.
27 अक्टूबर को पैरोल समाप्त होने के बाद Supreme Court 6 नवंबर को उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर सुनवाई करेगा.
Supreme Court ने अपने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि वह 2013 में जोधपुर में एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न के मामले में आसाराम द्वारा दायर अपील के संबंध में निचली अदालत के रिकॉर्ड, भौतिक और डिजिटल दोनों रूपों में, मंगवाए. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को दोपहर 2 बजे निर्धारित की है.
इससे पहले, Gujarat उच्च न्यायालय ने स्वयंभू धर्मगुरु की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने मानवीय आधार पर 20 दिनों की अस्थायी रिहाई की मांग की थी ताकि वे अपनी 83 वर्षीय पत्नी से मिल सकें, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है, हालांकि अदालत ने उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उनसे बात करने की अनुमति दी.
आसाराम को 2013 में सूरत स्थित अपने आश्रम में एक महिला शिष्य के साथ कई बार बलात्कार करने के आरोप में Gujarat की निचली अदालत ने दोषी ठहराया था.
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एएसएच/वीसी


