Supreme Court ने ओबीसी क्रीमी लेयर आरक्षण के मामले में केंद्र सरकार की संशोधन याचिका को किया खारिज

New Delhi, 6 नवंबर . Supreme Court ने Friday को ओबीसी क्रीमी लेयर आरक्षण के मामले में केंद्र Government की संशोधन याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने दोहराया कि ओबीसी आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर तय करते समय माता-पिता की वेतन से होने वाली आय को शामिल नहीं किया जाएगा.
Supreme Court ने Friday को सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि क्रीमी लेयर से बाहर रखने का निर्धारण माता-पिता की आय के बजाय उनकी सेवा संबंधी स्थिति और पद के आधार पर किया जाएगा.
11 मार्च को Supreme Court ने ‘India Government बनाम रोहित नाथन’ मामले में ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर के मानदंडों को लेकर बेहद महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया था. क्रीमी लेयर का निर्धारण ‘स्टेटस-बेस्ड’ या पद-आधारित है, न कि पूरी तरह ‘इनकम-बेस्ड’ (आय-आधारित). माता-पिता का पद (जैसे ग्रुप ए, बी, सी या डी) क्या है, यह देखना जरूरी है.
आमतौर पर माना जाता है कि 8 लाख से अधिक सालाना आय होने पर उम्मीदवार क्रीमी लेयर में आ जाता है. लेकिन मूल नियमों (1993 ऑफिस मेमोरेंडम) के अनुसार, वेतन और खेती की जमीन से होने वाली आय को इस 8 लाख की गणना से कड़ाई से बाहर रखा गया है. खारिज की गई केंद्र Government की याचिका में सबसे बड़ी मांग यह थी कि Supreme Court इस फैसले को ‘रेट्रोस्पेक्टिव’ यानी पिछली तारीख के बजाय ‘प्रोस्पेक्टिव’ या भविष्य की तारीख से लागू करने का आदेश दे
Government का तर्क था कि अगर 11 मार्च के फैसले को पिछली तारीखों से लागू किया गया, तो साल 2012 से अब तक हो चुकी नियुक्तियों, सेवा आवंटन (जैसे आईएएस, आईपीएस, आईएफएस कैडर आवंटन) और सीनियरिटी लिस्ट को दोबारा बदलना पड़ेगा. इससे उन कर्मचारियों पर भी असर पड़ेगा जो इस केस में पक्षकार भी नहीं हैं और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो जाएगी.
केंद्र Government ने कोर्ट से मांग की थी कि पीएसयू, बैंकों और प्राइवेट सेक्टर के पदों की तुलना Governmentी रैंक से करने के लिए एक नई, समान नीति तैयार करने के लिए Government को 2 वर्ष का समय दिया जाए. हालांकि, कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया.
याचिकाकर्ता के वकील वरुण ठाकुर ने मीडिया से कहा, “ओबीसी आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों, खासकर ‘क्रीमी लेयर’ और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) से जुड़े मुद्दों को आज एक बार फिर स्पष्ट किया गया है. 11 मार्च को अदालत ने एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया था कि ‘क्रीमी लेयर’ का दर्जा तय करते समय वेतन और कृषि से होने वाली आय को नहीं गिना जाएगा. इसके बावजूद, India Government ने एक अर्जी दायर की. इसमें कहा गया कि फैसला तो सही है, लेकिन इसे भविष्य से लागू किया जाना चाहिए. जो लोग पहले ही अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं, उन्हें कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए.”
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