तरुण तेजपाल को राहत नहीं, Supreme Court ने सजा पर रोक लगाने की मांग की खारिज

New Delhi, 6 नवंबर . Supreme Court ने Friday को 2013 के दुष्कर्म मामले में तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया. अदालत ने उनकी 10 साल की कठोर कारावास की सजा पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी. तेजपाल ने अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई पूरी होने तक सजा निलंबित करने की मांग की थी.
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद ईमेल और संदेशों सहित साक्ष्यों पर पहली नजर में विचार करने के बाद अदालत सजा पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है.
Supreme Court ने कहा, “अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों और रिकॉर्ड में मौजूद ईमेल तथा संदेशों सहित अन्य सामग्री को देखने के बाद पहली नजर में हमें यह मामला सजा निलंबित करने योग्य नहीं लगता.”
सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह ऐसा मामला है जिसमें बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया गया है. उन्होंने दलील दी कि ऐसे मामलों में आमतौर पर अपील लंबित रहने तक सजा पर रोक लगा दी जाती है.
तेजपाल की ओर से पेश एक अन्य वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि उनका मुवक्किल पूरे मुकदमे के दौरान जमानत पर रहा और उसने कभी जमानत की शर्तों का दुरुपयोग नहीं किया.
हालांकि, जस्टिस सुंदरेश की अगुवाई वाली पीठ इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई और सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.
गोवा Government की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मांग का विरोध किया. उन्होंने पीड़िता द्वारा मामले की शिकायत किए जाने के बाद तेजपाल की ओर से भेजे गए माफी मांगने वाले ईमेल का जिक्र किया और Supreme Court में उसकी सामग्री पढ़कर सुनाई.
इससे पहले 3 नवंबर को Supreme Court ने तेजपाल की दोषसिद्धि और 10 साल की सजा को चुनौती देने वाली याचिका तथा गोवा Government की सजा बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई 5 नवंबर तक टाल दी थी. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अतिरिक्त समय मांगा था.
उस सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने अदालत से अनुरोध किया था कि दिवाली के दौरान तेजपाल को घर जाने की अनुमति दी जाए. उन्होंने कहा था कि बरी किए जाने का फैसला पलटे जाने का यह मतलब नहीं होना चाहिए कि उन्हें अस्थायी राहत भी न मिले, हालांकि गोवा Government ने इस मांग का विरोध किया था.
तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को Supreme Court में चुनौती दी है, जिसमें सत्र अदालत द्वारा दिए गए बरी करने के आदेश को रद्द करते हुए उन्हें दुष्कर्म और अन्य अपराधों का दोषी ठहराया गया था.
6 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सत्र अदालत के फैसले को रद्द करते हुए तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया था. अदालत ने उन्हें 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी.
यह मामला नवंबर 2013 में गोवा के एक लग्जरी होटल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक जूनियर महिला सहकर्मी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है. महिला ने आरोप लगाया था कि तेजपाल ने होटल की लिफ्ट के अंदर उस पर यौन हमला किया था.
मई 2021 में सत्र अदालत ने तेजपाल को बरी कर दिया था. अदालत का कहना था कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे जाकर अपना मामला साबित करने में असफल रहा और जांच में कई कमियों का भी जिक्र किया गया था. इसके बाद गोवा Government ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.
Supreme Court द्वारा आत्मसमर्पण से छूट देने की मांग खारिज किए जाने के बाद तेजपाल ने 14 सितंबर को गोवा के मापुसा स्थित अतिरिक्त सत्र अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया था. इसके बाद उन्हें सजा काटने के लिए उत्तरी गोवा के कोलवाले स्थित सेंट्रल जेल भेज दिया गया.
अलग से गोवा Government ने हाईकोर्ट द्वारा सुनाई गई 10 साल की सजा बढ़ाने की मांग को लेकर भी Supreme Court का रुख किया है.
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एएमटी/वीसी


