
New Delhi, 5 जुलाई . भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस शक्ति और आईएनएस कवरत्ती ने क्षेत्र में सिंगापुर की सफल बंदरगाह यात्रा पूरी की है. ये भारतीय नौसैनिक जहाज अपनी परिचालन तैनाती के तहत सिंगापुर पहुंचे थे. इस यात्रा ने India और सिंगापुर के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी तथा क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को और सुदृढ़ किया.
सिंगापुर प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना और रिपब्लिक ऑफ सिंगापुर नेवी के बीच अनेक पेशेवर गतिविधियां भी आयोजित की गईं. इनमें दोनों देशों के नौसैनिकों द्वारा क्रॉस-डेक विजिट शामिल रहा. इसके माध्यम से ऑपरेशनल प्रक्रियाओं की समझ बढ़ाने, आपसी समन्वय को मजबूत करने तथा संयुक्त अभियानों में बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया गया.
इस दौरान समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया. दोनों नौसेनाओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा देने के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई.
भारतीय नौसेना की यह तैनाती विजन ‘महासागर’ तथा एक्ट ईस्ट नीति के अनुरूप है. इस नीति का उद्देश्य मित्र देशों के साथ समुद्री सहयोग को मजबूत करना और क्षेत्र में सुरक्षित एवं स्थिर समुद्री वातावरण सुनिश्चित करना है. यह यात्रा India और सिंगापुर के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक एवं समुद्री संबंधों की गहराई को दर्शाती है. साथ ही, यह दोनों देशों की उस साझा सोच को भी प्रतिबिंबित करती है, जिसके तहत एक सुरक्षित, स्थिर और सहयोगात्मक समुद्री क्षेत्र के निर्माण के लिए मिलकर कार्य किया जा रहा है.
गौरतलब है कि पूर्वी बेड़े के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति, इससे पहले कमांडिंग रियर एडमिरल आलोक आनंद के नेतृत्व में 29 जून को थाईलैंड के सत्ताहिप बंदरगाह पर अपनी यात्रा पूर्ण करने के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में आगे की तैनाती के लिए रवाना हुए थे.
भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस कवरत्ती ने वियतनाम की भी तीन दिवसीय यात्रा की थी. 22 से 24 जून तक भारतीय युद्धपोत यहां वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी में मौजूद रहे. इस महत्वपूर्ण पोर्ट कॉल ने India और वियतनाम के बीच समुद्री सहयोग, रणनीतिक साझेदारी तथा रक्षा संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाई.
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जीसीबी/एसके