टीवी इंडस्ट्री में सफलता रातोंरात नहीं मिलती, धैर्य और लगातार मेहनत ही असली चाबी है : अद्रिजा रॉय

Mumbai , 8 जून . टीवी इंडस्ट्री की चमक-दमक के पीछे की सच्चाई को लेकर Actress अद्रिजा रॉय ने अपने विचार रखे. को दिए इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस इंडस्ट्री में टिके रहना आसान नहीं है, इसके लिए धैर्य, मेहनत और लगातार सुधार की जरूरत होती है.

अद्रिजा रॉय ने कहा, ”टीवी इंडस्ट्री में काम की गति बहुत तेज होती है. कई बार ऐसा होता है कि आज किसी एपिसोड की शूटिंग होती है और वह अगले ही दिन या बहुत कम समय में टीवी पर प्रसारित हो जाता है. इस तेज रफ्तार में कलाकारों को हर समय तैयार रहना पड़ता है और अपने किरदार को पूरी एनर्जी के साथ निभाना होता है. हर कॉल टाइम पर, हर शूटिंग शेड्यूल में बहुत बड़ी प्रोडक्शन टीम काम करती है, और कलाकार को इन सबके बीच संतुलन बनाए रखना होता है. ऐसे माहौल में शांत और फोकस्ड रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि जल्दबाजी में किया गया काम कई बार असर को कम कर सकता है.”

उन्होंने कहा, ”टीवी इंडस्ट्री में सफलता तुरंत नहीं मिलती. कई लोग सोचते हैं कि एक अच्छा सीन या एक अच्छा प्रदर्शन उन्हें रातोंरात पहचान दिला देगा, लेकिन वास्तविकता अलग है. टीवी में नाम कमाने के लिए लगातार समय देना पड़ता है. एक-दो अच्छे सीन से लोकप्रियता मिल सकती है, लेकिन स्थायी सफलता की चाबी को लगातार मेहनत और धैर्य ही है. social media पर भले ही कोई कलाकार जल्दी वायरल हो जाए, लेकिन टीवी इंडस्ट्री में पहचान धीरे-धीरे बनती है और समय के साथ मजबूत होती है.”

अद्रिजा रॉय ने लोकप्रियता और सफलता के बीच फर्क को समझाते हुए कहा, ”लोकप्रियता अक्सर अस्थायी होती है, जो किसी वायरल सीन, चर्चा या social media ट्रेंड से जल्दी मिल सकती है. यह लंबे समय तक नहीं टिकती. दूसरी ओर सफलता एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें लगातार काम करना, अपने अभिनय को बेहतर बनाना और हर किरदार में सुधार लाना जरूरी होता है. जो लोग इस इंडस्ट्री में स्थायी रूप से सफल होना चाहते हैं, उन्हें समझना होगा कि सिर्फ चर्चा में रहना काफी नहीं है, बल्कि अपने काम में निरंतरता बनाए रखना जरूरी है.”

उन्होंने कहा, ”धैर्य मेरे लिए एक सोचने का तरीका बन गया है. धैर्य ने मुझे अपने काम के प्रति ज्यादा गंभीर और शांत बनाया है. अब मैं हर सीन को जल्दीबाजी में नहीं करती, बल्कि उसे समझकर और समय देकर निभाने की कोशिश करती हूं.”

पीके/एबीएम

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