निवेशकों का भरोसा और आर्थिक मजबूती बनाए रखने के लिए मजबूत वित्तीय प्रशासन जरूरी: सरकारी अधिकारी

New Delhi, 17 जून . कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की संयुक्त सचिव अनीता शाह अकेला ने Wednesday को कहा कि India की ‘विकसित India 2047’ की यात्रा केवल आर्थिक विकास पर नहीं, बल्कि भरोसे और मजबूत वित्तीय प्रशासन पर भी आधारित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियां और दिवालियापन से पहले समाधान की मजबूत व्यवस्था उद्यमों के मूल्य, निवेशकों के विश्वास और अर्थव्यवस्था की मजबूती को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं.

राष्ट्रीय राजधानी में एसोचैम द्वारा आयोजित वित्तीय प्रशासन के भविष्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और संप्रभु एआई जैसी तकनीकें बड़े बदलाव के अवसर प्रदान करती हैं, लेकिन तकनीक का उपयोग हमेशा मानवीय निर्णय, जवाबदेही और नैतिक मूल्यों के साथ होना चाहिए.

अनीता शाह अकेला ने कहा, “आखिरकार वही संस्थान लंबे समय तक टिकते हैं, जो केवल शक्तिशाली नहीं बल्कि सबसे अधिक भरोसेमंद होते हैं.”

इस सम्मेलन में ‘विकसित India 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विश्वास, पारदर्शिता, जवाबदेही और जिम्मेदार नवाचार की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि India की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में इन मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है.

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली वित्तीय रिपोर्टिंग मजबूत कॉर्पोरेट प्रशासन और आर्थिक विकास की नींव है.

उन्होंने वैश्विक और घरेलू प्रशासनिक विफलताओं से सबक लेने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही केवल नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक रणनीतिक आवश्यकता है.

उन्होंने कहा, “भू-Political अनिश्चितताओं, साइबर खतरों और एआई से जुड़े बदलावों के इस दौर में विश्वास केवल जवाबदेही, पेशेवर साहस और पारदर्शी जानकारी साझा करने की प्रतिबद्धता से ही बनाया जा सकता है.”

भारतीय कॉर्पोरेट मामलों के संस्थान (आईआईसीए) के महानिदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने कहा कि India की नियामक व्यवस्था धीरे-धीरे नियम-आधारित मॉडल से विश्वास-आधारित मॉडल की ओर बढ़ रही है.

उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण, नियमों में ढील और कई अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने जैसे कदम इस बदलाव को मजबूत कर रहे हैं. उन्होंने बोर्ड और वित्तीय क्षेत्र के नेताओं से केवल शेयरधारकों के हित तक सीमित न रहकर सभी हितधारकों के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील की.

ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने कहा, “जैसे-जैसे कारोबारी दुनिया अधिक जुड़ी हुई होती जा रही है, कंपनियों के निदेशक मंडलों को केवल शेयरधारकों के हितों तक सीमित सोच से आगे बढ़ना होगा और सभी हितधारकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी.”

सम्मेलन में विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और वित्तीय प्रशासन से जुड़ी नई चुनौतियों और अवसरों पर अपने विचार साझा किए. वहीं, वक्ताओं ने बदलते कारोबारी माहौल में मजबूत प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया.

डीबीपी

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