
अयोध्या, 29 जनवरी . यूजीसी की नई गाइडलाइन को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहा है और मामला Supreme Court तक पहुंच गया है. Supreme Court ने Thursday को सुनवाई करते हुए नए नियमों पर रोक लगा दी है. कोर्ट का कहना है कि नए नियमों से दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है.
संत-समाज ने खुले दिल से कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और उन्हें भरोसा है कि अगली सुनवाई में भी फैसला सामान्य वर्ग के पक्ष में आएगा.
Supreme Court द्वारा यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाने के संबंध में अयोध्याधाम स्थित साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास महाराज ने कहा, “मैं Supreme Court के इस फैसले की तहे दिल से सराहना करता हूं और इसकी प्रशंसा करता हूं, जिस तरह से उन्होंने यूजीसी के इस काले कानून पर रोक लगाई है और इसकी सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की है. निश्चित रूप से इस कानून के लागू होने के बाद स्वर्ण समुदाय के लोग देश भर में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, अपनी चिंताओं को व्यक्त करने के लिए सड़कों पर उतर रहे थे, उनकी मांगों को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है और हम एकता की बात करते हैं, भेदभाव की नहीं. अगर देश को अखंड बनाना है तो जातिगत भेदभाव को दूर करना होगा. India को विश्व गुरु बनाने के लिए एकता और अंखड़ता की जरूरत है. अगर देश बंटेगा तो टूटेगा.”
महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा, “हम सभी सनातनियों और देश के नागरिकों को हमेशा से Supreme Court पर भरोसा रहा है, क्योंकि कोई भी नियम या कानून जो किसी एक समुदाय को दूसरे समुदाय से अधिक महत्व देता है, या कुछ को अनुचित महत्व देकर दूसरों की उपेक्षा करता है, वह घृणा फैलाएगा और अशांति का कारण बनेगा, इसीलिए ऐसी बातें सही नहीं हैं. मेरी युवाओं से भी अपील है कि वो Supreme Court पर विश्वास रखें, क्योंकि वहीं देश के लिए हर मुद्दे पर न्याय करने की क्षमता रखता है.”
उन्होंने आगे कहा, “हम Supreme Court के फैसले का सम्मान करते हैं, और अगली तारीख पर जो भी सुनवाई होगी, वो भेदभाव से रहित और सभी वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर की जाएगी.”
वहीं, जगद्गुरु परमहंस आचार्य महाराज ने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय ने न्याय दिया है. सर्वोच्च न्यायालय न्याय का सर्वोच्च प्राधिकरण है और देश की जनता की अपेक्षाएं पूरी हुई हैं. स्कूलों में एक ऐसा कानून था जो छात्रों को अनावश्यक रूप से एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूर करता था. जब बच्चे पढ़ने जाते हैं तो शिक्षक पहले से ही पढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं और छात्र कक्षाओं में बैठे होते हैं. ऐसे अलग कानून की कोई आवश्यकता नहीं थी. अब, इस तरह के कानून से यह और भी आगे बढ़ सकता था, कल Police प्रशिक्षण में, परसों सेना में और यह पूरे देश में फैल सकता था, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय ने न्याय का सही फैसला दिया है और मैं सर्वोच्च न्यायालय का आभारी हूं.”
ऋषिकेश के श्री India मिलाप आश्रम के महंत स्वामी नारायण दास महाराज ने Supreme Court के फैसले का स्वागत किया और कहा, “यूजीसी का नया नियम तो पहले से ही यूजीसी में मौजूद है. इसमें नया क्या है? उन्होंने बस एक विशेष वर्ग की उपेक्षा की है. हमारे देश में सिर्फ प्रतिमाएं बन रही हैं और प्रतिभाओं का गला घोंटा जा रहा है. हमने कभी भी बचपन में जातिगत भेदभाव नहीं देखा है, राजनीति समाज को तोड़ने का काम कर रही है.”
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पीएस/डीकेपी