
विदिशा, 4 जुलाई . मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) की ओर से जूनोटिक बीमारियों को रोकने के लिए ‘नेशनल वन हेल्थ मिशन’ के तहत ‘पशुजन्य युद्ध अभ्यास’ (पीवाईए) नाम से तीसरी राष्ट्रीय स्तर की मॉक ड्रिल आयोजित की गई.
Madhya Pradesh के विदिशा जिले के खारी गांव में 29 जून से 3 जुलाई तक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अभ्यास में पशु स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य, वन्यजीव, खाद्य सुरक्षा, प्रयोगशाला और जिला प्रशासन से जुड़े सभी संबंधित पक्षों को एक साथ लाया गया. इस ड्रिल को ऑपरेशनल तैयारी, अलग-अलग क्षेत्रों के बीच तालमेल और संचार, और जूनोटिक बीमारी के फैलने पर शुरुआती अलर्ट से लेकर उसे रोकने (कंटेनमेंट) तक की प्रक्रिया का आकलन करने के लिए डिजाइन किया गया था.
इस अभ्यास में जानवरों में इन्फ्लूएंजा ए (एच1एन1) के फैलने की स्थिति को देखा गया, जिसमें इंसानों और वन्यजीवों में इसके फैलने की संभावना थी. इस स्थिति पर काम करते हुए प्रतिभागियों ने पूरी प्रतिक्रिया प्रक्रिया की जांच की. इस दौरान बीमारी की निगरानी, शुरुआती चेतावनी और रिपोर्टिंग, बीमारी फैलने की जांच और फील्ड महामारी विज्ञान, सैंपल इकट्ठा करना और उन्हें पहुंचाना, प्रयोगशाला में जांच, जोखिम का आकलन, घटना प्रबंधन, बायो-सिक्योरिटी, बीमारी को रोकने के ऑपरेशन, आवाजाही पर नियंत्रण और जनता के साथ संचार की जांच की गई.
इस अभ्यास में India Government के पशुपालन और डेयरी विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, India Government के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय, राष्ट्रीय बीएसएल-3 नेटवर्क के तहत आने वाली प्रयोगशालाओं, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) Bhopal , पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ-साथ Madhya Pradesh के राज्य और जिला पशुपालन, स्वास्थ्य और वन विभागों तथा राज्य और जिला प्रशासन ने सक्रिय रूप से भाग लिया.
अभ्यास के आखिरी दिन पशुपालन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक की गई. इसमें एनसीडीसी के निदेशक, Madhya Pradesh के पशुपालन निदेशक और बैक-एंड, फ्रंट-एंड व ऑब्जर्वर टीमें शामिल हुईं. बैठक में अभ्यास के दौरान नोट की गई बातों की समीक्षा की गई, कमियों पर चर्चा हुई और आगे की राह पर विचार-विमर्श किया गया.
मीटिंग का मुख्य फोकस इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल को मजबूत करने, अलग-अलग सेक्टरों के बीच तालमेल बेहतर करने और पशु स्वास्थ्य से जुड़ी इमरजेंसी व जूनोटिक बीमारियों के फैलने की स्थिति में प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर था.
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एसडी/डीकेपी