
Bhopal , 26 मई . Madhya Pradesh के रीवा जिले में दो जैन साध्वी की सड़क हादसे में हुई मौत के मामले में समाज के विभिन्न वर्गों में रोष है. पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री अरुण यादव ने देश में संत सुरक्षा नीति लागू करने की मांग की है. दरअसल, बीते दिनों रीवा में जैन साध्वी मति माता एवं उपशममति माता पैदल विहार पर थी. इसी दौरान रीवा जिले में एक कार ने टक्कर मार दी थी.
इस हादसे में दोनों साध्वी की मौत हो गई थी. पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री एवं Madhya Pradesh कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने जैन संत समाज की हृदयविदारक घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसे केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था, संस्कृति और मानवता को झकझोर देने वाली घटना बताया है.
अरुण यादव ने कहा कि श्रुति मति माता एवं उपशममति माता का असामयिक समाधि मरण अत्यंत पीड़ादायक एवं दुखद है. उन्होंने कहा कि जो साध्वी माताएं अहिंसा, संयम, धर्म और मानवता का संदेश देते हुए पैदल विहार कर रही थीं, उन्हें तेज रफ्तार वाहन द्वारा कुचल दिया जाना अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक विषय है.
उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक सामान्य सड़क हादसा मानकर नजरअंदाज नहीं की जा सकती. इसकी निष्पक्ष, उच्च स्तरीय एवं गहन जांच होना आवश्यक है, ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके और दोषियों को कठोरतम सजा मिल सके. अरुण यादव ने शासन-प्रशासन से मांग की कि मामले की न्यायिक जांच अथवा विशेष जांच दल (एसआईटी) के माध्यम से विस्तृत जांच कराई जाए. साथ ही घटना से जुड़े सभी डिजिटल एवं cctv साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो.
उन्होंने देशभर में पैदल विहार करने वाले साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि Government संत समाज की सुरक्षा हेतु एक सख्त एवं प्रभावी ‘संत सुरक्षा नीति’ लागू करे, जिससे भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके. इससे पहले इंदौर में जैन समाज ने रीवा में जैन संतों की मौत के विरोध में Monday को बड़ा प्रदर्शन किया था. शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजजन एकत्रित हुए और रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे.
उन्होंने Chief Minister के नाम इंदौर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जैन संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की. जैन समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि जैन संत निरंतर पदयात्रा और भ्रमण करते रहते हैं. वे बिना किसी वाहन के पैदल यात्रा करते हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए जाने चाहिए. समाजजनों का कहना था कि रीवा में हुई घटना ने पूरे देश के जैन समाज को आहत किया है और अब संतों की सुरक्षा को लेकर ठोस नीति बनाए जाने की आवश्यकता है.
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एसएनपी/डीकेपी