
तिरुवनंतपुरम, 21 अप्रैल . सबरीमला मंदिर में 2025 में सोने की परत वाले पैनल हटाए जाने के मामले ने अब फिर से जोर पकड़ लिया है. इस पूरे विवाद की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने अपनी जांच तेज कर दी है और कई अहम लोगों से पूछताछ की जा रही है. मामला इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि एसआईटी को जल्द ही अपनी पूरी रिपोर्ट हाई कोर्ट में जमा करनी है, जिसने पिछले साल इस जांच के आदेश दिए थे.
Monday को देवस्वम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पीएस प्रसांत से तीसरी बार पूछताछ की गई. इसके अलावा बोर्ड के पूर्व सदस्य अजीकुमार से भी सवाल-जवाब किए गए. जांच टीम खासतौर पर इस बात पर ध्यान दे रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में सोने के पैनल मंदिर के तंत्रि (मुख्य पुजारी) को सौंपे गए, वो भी बिना केरल हाईकोर्ट की अनुमति के. एसआईटी का मानना है कि यह स्थापित नियमों का साफ उल्लंघन है.
यह मामला पहले भी काफी विवादों में रहा था, जिसके बाद प्रसांत को हाई कोर्ट के सामने माफी भी मांगनी पड़ी थी. अब एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस फैसले में जरूरी प्रक्रिया को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया और क्या इसके पीछे किसी तरह का दबाव या प्रभाव था.
जांच का दायरा अब और भी बढ़ गया है. एसआईटी ने 7 सितंबर 2025 को पैनल्स को ले जाने में शामिल सभी अधिकारियों के बयान दर्ज किए हैं. ये बयान सबरीमला के सन्निधानम और तिरुवनंतपुरम दोनों जगहों पर लिए गए हैं.
इस बीच, थिरुवाभरणम कमिश्नर की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है, जिनका बयान निर्णायक साबित होने की उम्मीद है. शुरुआत में उन्होंने स्मार्ट क्रिएशंस नाम की कंपनी की तकनीकी क्षमता पर सवाल उठाए थे, जिसे गोल्ड प्लेटिंग का काम दिया गया था. लेकिन बाद में उन्होंने उसी कंपनी के पक्ष में रिपोर्ट दे दी. इस बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या उन पर किसी तरह का दबाव था.
इस पूरे मामले में कई स्तरों पर फैसलों की जांच हो रही है. एसआईटी की रिपोर्ट आने वाले हफ्तों में सामने आ सकती है. इस बीच मंदिर की संपत्ति के प्रबंधन में पारदर्शिता और कोर्ट के निर्देशों के पालन को लेकर भी मांग उठ रही हैं.
बता दें कि इस गोल्ड स्कैम से जुड़े दो अलग-अलग चार्जशीट में कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. हालांकि फिलहाल सभी जमानत पर बाहर हैं.
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पीआईएम/पीएम