आरएसएस प्रमुख 25 अगस्त से तीन देशों का करेंगे दौरा, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का देंगे संदेश

वाशिंगटन, 20 अगस्त . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त से तीन देशों (अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन) का दौरा करेंगे. मोहन भागवत का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुताबिक, भागवत को इन देशों (अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन) के स्थानीय संगठनों और भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े संस्थानों ने आमंत्रित किया है. इस कार्यक्रम को रक्षा बंधन से भी जोड़ा जा रहा है और आयोजक इसे ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की भारतीय अवधारणा से जोड़ रहे हैं.

इससे पहले 100 से अधिक कनाडाई हिंदू और नागरिक स्वतंत्रता संगठनों ने Prime Minister मार्क कार्नी की Government से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को कनाडा आने की अनुमति देने का आग्रह किया और उन्हें प्रवेश के लिए अयोग्य घोषित करने की मांगों को खारिज कर दिया.

कार्नी और तीन वरिष्ठ मंत्रियों को लिखे एक संयुक्त पत्र में इन संगठनों ने कहा कि भागवत से संबंधित कोई भी आव्रजन या सार्वजनिक सुरक्षा निर्णय विश्वसनीय साक्ष्य और उचित प्रक्रिया पर आधारित होना चाहिए, न कि Political दबाव पर.

पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों ने कहा कि भागवत की प्रस्तावित यात्रा कनाडा के हिंदू समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, जिसकी संख्या उन्होंने दस लाख से अधिक बताई है.

उन्होंने आरएसएस को सामुदायिक सेवा, सामाजिक पहलों, सांस्कृतिक गतिविधियों और सार्वजनिक चर्चा में शामिल एक प्रमुख भारतीय संगठन के रूप में वर्णित किया.

पत्र में भागवत पर प्रतिबंध लगाने की मांग का जिक्र करते हुए कहा गया कि ऐसा कदम साक्ष्य, उचित प्रक्रिया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता और कनाडाई कानून के तहत समान व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े करेगा.

हस्ताक्षरकर्ताओं के अनुसार, दो सांसदों ने कथित तौर पर भागवत पर घृणास्पद भाषण देने, धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की वकालत करने, लक्षित धमकी देने और आपराधिक या सूचीबद्ध आतंकवादी संगठनों से संबंध रखने का आरोप लगाया है.

पत्र में कहा गया कि ये बेहद गंभीर आरोप हैं. इन्हें Political बयानबाजी नहीं माना जाना चाहिए और स्पष्ट, विश्वसनीय और स्वतंत्र रूप से सत्यापित साक्ष्य के बिना तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया जाना चाहिए.

समूहों ने यात्रा का विरोध करने वाले सांसदों और संगठनों से अपने दावों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा. उन्होंने कहा कि उपलब्ध किसी भी सामग्री का मूल्यांकन स्थापित कनाडाई कानूनी और Governmentी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए.

पत्र में इस दावे को भी चुनौती दी गई है कि भागवत की उपस्थिति से ‘सामाजिक अशांति’ फैल सकती है या कनाडाई नागरिकों को खतरा हो सकता है.

एमएस/एबीएम

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