ओडिशा में तकनीकी और प्रोफेशनल शिक्षा में बढ़ा आरक्षण, 2026-27 सत्र से एसटी, एससी और एसईबीसी छात्रों को मिलेगा लाभ

भुवनेश्वर, 2 जून . Odisha Government ने अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी) और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) के छात्रों के लिए तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा में आरक्षण बढ़ाने का बड़ा फैसला लागू कर दिया है. राज्य Government की नई आरक्षण नीति 2026-27 शैक्षणिक सत्र से प्रभावी होगी और इसका लाभ इंजीनियरिंग, मेडिकल, सहित कई पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को मिलेगा.

Tuesday को अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी की. यह फैसला 4 अप्रैल को राज्य मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णय के आधार पर लागू किया गया है. Chief Minister मोहन चरण माझी ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए विभाग को इसे जल्द लागू करने के निर्देश दिए थे.

राज्य Government का कहना है कि यह कदम लंबे समय से उठ रही उस मांग को पूरा करता है, जिसमें एसटी, एससी और एसईबीसी समुदायों को पेशेवर शिक्षा में उचित प्रतिनिधित्व देने की बात कही जा रही थी. Government के अनुसार, वर्षों से यह मुद्दा लंबित था, लेकिन नई Government ने सत्ता संभालने के दो वर्षों के भीतर इसे लागू कर दिया.

Odisha की कुल आबादी में अनुसूचित जनजातियों की हिस्सेदारी 22.85 प्रतिशत और अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी 17.13 प्रतिशत है. वहीं, एसईबीसी वर्ग की सटीक जनसंख्या का आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन राज्य में इसकी संख्या काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है.

अब तक सामान्य स्नातक पाठ्यक्रमों जैसे बीए, बीकॉम और बीएससी में एसटी के लिए 22.5 प्रतिशत, एससी के लिए 16.25 प्रतिशत और एसईबीसी के लिए 11.5 प्रतिशत आरक्षण लागू था. इसके विपरीत इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे प्रोफेशनल कोर्सों में एसटी छात्रों को केवल 12 प्रतिशत और एससी छात्रों को 8 प्रतिशत आरक्षण मिलता था, जबकि एसईबीसी वर्ग के लिए कोई आरक्षण नहीं था.

नई नीति के तहत तकनीकी और प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में एसटी छात्रों का आरक्षण 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 22.5 प्रतिशत, एससी छात्रों का आरक्षण 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 16.25 प्रतिशत और एसईबीसी छात्रों के लिए पहली बार 11.25 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है.

यह नई व्यवस्था राज्य के सभी विश्वविद्यालयों, संबद्ध कॉलेजों, शैक्षणिक संस्थानों, आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में लागू होगी. इसके दायरे में इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट, कंप्यूटर एप्लीकेशन, चिकित्सा, सर्जरी, दंत चिकित्सा, नर्सिंग, फार्मेसी, एलाइड हेल्थ साइंस, पशु चिकित्सा, आयुर्वेद, होम्योपैथी, कृषि, वास्तुकला, प्लानिंग तथा सिनेमैटिक आर्ट्स एवं टेक्नोलॉजी जैसे अनेक पेशेवर पाठ्यक्रम शामिल होंगे.

Government का मानना है कि इस फैसले से वंचित वर्गों के छात्रों को उच्च तकनीकी और पेशेवर शिक्षा में अधिक अवसर मिलेंगे और भविष्य में रोजगार के क्षेत्र में उनकी भागीदारी भी मजबूत होगी.

वीकेयू/डीकेपी

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