
वॉशिंगटन, 2 मई . India और इजरायल की साझेदारी मुख्य रूप से आतंकवाद से निपटने, लोगों की जान बचाने और आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने पर केंद्रित एक व्यावहारिक सहयोग है.
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आज दोनों देश समान सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जहां दुश्मन नागरिकों का इस्तेमाल ढाल के रूप में करते हैं, सीमा पार से हमले करते हैं और आतंक फैलाने की रणनीति अपनाते हैं. इसके जवाब में दोनों देशों ने सर्जिकल स्ट्राइक, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और नागरिक नुकसान को न्यूनतम रखने जैसी नीतियां अपनाई हैं.
अमेरिका स्थित जर्नल द एल्गेमाइनर में लिखते हुए भारतीय-जर्मन अंतरसांस्कृतिक और भू-Political सलाहकार पौशाली लास ने कहा कि इज़राइल में हाल ही में मनाए गए मेमोरियल डे और स्वतंत्रता दिवस इस बात की याद दिलाते हैं कि राष्ट्र निर्माण की कीमत युद्धभूमि और आम जिंदगी दोनों में चुकानी पड़ती है.
उन्होंने कहा कि एक साल पहले पहलगाम में India ने भी यही सच्चाई देखी, जब Pakistan समर्थित आतंकवादी भारतीय सीमा में घुस आए और महिलाओं व बच्चों के सामने 26 पुरुषों की निर्मम हत्या कर दी.
लास ने कहा, “यह कोई अलग-थलग हिंसक घटना नहीं थी, बल्कि नागरिकों को निशाना बनाकर विश्वास तोड़ने और भय फैलाने की सोची-समझी साजिश थी.”
उन्होंने कहा कि India की ओर से शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर एक बड़ा रणनीतिक बदलाव था. इसके तहत पहलगाम आतंकी हमले के बाद India ने सिंधु जल संधि के कई अहम प्रावधानों को निलंबित कर दिया.
India पहले Pakistan को नदी प्रवाह और जल स्तर से जुड़ा हाइड्रोलॉजिकल डेटा उपलब्ध कराता था, जो उसकी कृषि व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण था. लेकिन हमले के बाद यह सहयोग रोक दिया गया.
लास ने कहा कि यह कदम वियना संधि कानून सम्मेलन के अनुच्छेद 62 के अनुरूप भी है, जो परिस्थितियों में बुनियादी बदलाव और विश्वास खत्म होने की स्थिति में संधि निलंबन की अनुमति देता है.
उन्होंने कहा कि India और इजरायल दोनों समान खतरों का सामना कर रहे हैं और समान तरीके से जवाब दे रहे हैं, लेकिन वैश्विक प्रतिक्रिया अलग-अलग रही है. इजरायल को फिलिस्तीन मुद्दे पर लगातार आलोचना झेलनी पड़ती है, जबकि Pakistan प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ India की कार्रवाई पर अपेक्षाकृत कम अंतरराष्ट्रीय आक्रोश देखने को मिला.
लास ने यह भी कहा कि India ने सूचना युद्ध के मोर्चे पर प्रभावी रणनीति अपनाई है. India ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को सनसनीखेज प्रचार के बजाय रणनीतिक उपलब्धियों के रूप में पेश किया, Pakistan आधारित दुष्प्रचार नेटवर्क को उजागर किया और फेक न्यूज से निपटने के लिए मीडिया साक्षरता बढ़ाई.
उन्होंने कहा, “यही वह क्षेत्र है, जहां इजरायल को अगला कदम उठाने की जरूरत है. केवल खुफिया तंत्र और रक्षा तकनीक काफी नहीं है, यदि उसके साथ स्पष्ट और प्रभावी संवाद न हो.”
लास ने जोर देकर कहा कि India और इजरायल दोनों समझते हैं कि आतंकवाद से अकेले नहीं लड़ा जा सकता. यूरोप और अमेरिका के सहयोगियों के साथ बेहतर खुफिया साझेदारी तथा जमीनी और सूचना दोनों मोर्चों पर आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति जरूरी होगी.
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डीएससी