रवि योग : सूर्य देव की आराधना कर पाएं सुख-समृद्धि, भद्रा में न करें ये काम

New Delhi, 7 जनवरी . सनातन धर्म में सूर्य देव की साधना का विशेष महत्व है. सूर्य आत्माकारक, नवग्रहों के राजा और प्रत्यक्ष देवता हैं. उनकी नियमित आराधना से स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, पराक्रम, सम्मान और समृद्धि प्राप्त होती है. कुंडली दोष दूर होते हैं और करियर में उन्नति मिलती है.

विशेष रूप से रवि योग में सूर्य देव की पूजा-अर्चना फलदायी हैं. इस शुभ योग में अर्घ्य, मंत्र जाप, आदित्य हृदय स्तोत्र या ‘ओम घृणि सूर्याय नमः’ से सूर्य की कृपा शीघ्र मिलती है, सुख-शांति और उच्च पद की प्राप्ति होती है.

दृक पंचांग के अनुसार, 8 जनवरी को षष्ठी तिथि सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगी, उसके बाद सप्तमी शुरू होगी. अगर कोई शुभ कार्य करना चाहते हैं, तो राहुकाल का समय जरूर ध्यान में रखें. इस दौरान कोई महत्वपूर्ण या शुभ काम नहीं करना चाहिए. राहुकाल दोपहर 1 बजकर 46 मिनट से 3 बजकर 4 मिनट तक रहेगा. चंद्रमा पूरे दिन सिंह राशि में गोचर करेंगे. सूर्योदय सुबह 7 बजकर 15 मिनट और सूर्यास्त शाम 5 मिनट 41 मिनट पर होगा.

पंचांग में रवि योग एक विशेष शुभ संयोग माना जाता है. यह सूर्य और चंद्रमा जैसे ग्रहों का योग है. जब चंद्रमा सूर्य से चौथे, छठे, नौवें या दसवें स्थान पर होता है, तब रवि योग बनता है. खास तौर पर, अगर सूर्य अश्विनी नक्षत्र में हो और चंद्रमा रोहिणी (चौथा), आर्द्रा (छठा), आश्लेषा (नौवां) या मघा (दसवां) नक्षत्र में हो, तो यह योग बनता है. रवि योग में किए गए कार्य जल्दी फल देते हैं और सफल होते हैं. इस मुहूर्त में सूर्य देव की आराधना करने से सुख, समृद्धि और सम्मान मिलता है. यह योग उच्च पद, प्रतिष्ठा और सफलता प्रदान करने वाला होता है.

यह समय कई शुभ कार्यों के लिए बेहद अनुकूल है. घर में नई कार लाने, प्रॉपर्टी का सौदा पक्का करने, कार बुकिंग कराने, दुकान का उद्घाटन करने, गृह प्रवेश करने या किसी नए बिजनेस या कार्य की शुरुआत करने के लिए रवि योग शुभ माना जाता है. ऐसे कार्यों से लंबे समय तक लाभ मिलता है.

वहीं, भद्रा काल अशुभ समय होता है. इस दौरान महत्वपूर्ण काम जैसे विवाह, मुंडन, नामकरण या नए निवेश जैसे कार्य नहीं करने चाहिए. भद्रा में शुरू किए कामों में बाधाएं आ सकती हैं. रवि योग में सूर्य देव को जल अर्पित कर पाठ करना चाहिए. धर्म शास्त्र के अनुसार,तांबे के लोटे में जल, रोली, गुड़, अक्षत डालकर जल देना चाहिए. इस दौरान ओम घृणि सूर्याय नम: का जप कर धूप-दीप जलाना चाहिए.

एमटी/एएस

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