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Monday, 19 October 2026
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राजेंद्र कुमार: हिंदी सिनेमा के सदाबहार सितारे, जिनकी रोमांटिक छवि ने उन्हें बनाया ‘जुबली कुमार’

राजेंद्र कुमार: हिंदी सिनेमा के सदाबहार सितारे, जिनकी रोमांटिक छवि ने उन्हें बनाया ‘जुबली कुमार’

New Delhi, 11 जुलाई . हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने अपनी अदाकारी, व्यक्तित्व और फिल्मों के जरिए दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी. ऐसे ही एक महान Actor थे राजेंद्र कुमार, जिन्हें हिंदी फिल्म जगत में प्यार से ‘जुबली कुमार’ के नाम से जाना जाता था. 12 जुलाई 1999 को उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर का एक चमकदार अध्याय समाप्त हो गया.

राजेंद्र कुमार का जन्म 20 जुलाई 1927 को सियालकोट (अब Pakistan) में हुआ था. विभाजन के बाद उनका परिवार India आ गया. Mumbai पहुंचने के बाद उन्होंने फिल्म जगत में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया. शुरुआती दौर में उन्होंने निर्देशक एच. एस. रवैल के साथ सहायक के रूप में काम किया और फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखीं.

राजेंद्र कुमार ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1950 के दशक में की और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई. फिल्म ‘मदर इंडिया’ (1957) में उनके अभिनय ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई. इसके बाद उन्होंने कई ऐसी फिल्मों में काम किया, जिन्होंने उन्हें हिंदी सिनेमा के शीर्ष Actorओं में शामिल कर दिया.

1960 का दशक राजेंद्र कुमार के करियर का स्वर्णिम समय माना जाता है. इस दौर में उनकी कई फिल्में लगातार सफल रहीं और सिनेमाघरों में लंबे समय तक चलीं. इसी वजह से उन्हें ‘जुबली कुमार’ का खिताब मिला. उनकी लोकप्रिय फिल्मों में ‘मेरे महबूब’, ‘संगम’, ‘दिल एक मंदिर’, ‘आरजू’, ‘सूरज’, ‘आई मिलन की बेला’ और ‘धूल का फूल’ जैसी फिल्में शामिल हैं.

राजेंद्र कुमार की खासियत उनकी भावनात्मक भूमिकाएं थीं. वे प्रेम, त्याग, पारिवारिक जिम्मेदारियों और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े किरदारों को प्रभावशाली ढंग से निभाते थे. उनकी स्क्रीन पर मौजूदगी में एक सहजता थी, जिससे आम दर्शक खुद को उनके किरदारों से जोड़ पाते थे.

Actor होने के अलावा राजेंद्र कुमार ने फिल्म निर्माण में भी हाथ आजमाया. उन्होंने अपने बेटे कुमार गौरव के करियर को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. फिल्म उद्योग में वे अपने सौम्य व्यवहार और मजबूत रिश्तों के लिए भी जाने जाते थे.

भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए India Government ने उन्हें ‘पद्म श्री’ सम्मान से सम्मानित किया था. चार दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने 80 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया और हिंदी सिनेमा को कई यादगार किरदार दिए.

12 जुलाई 1999 को Mumbai में उनका निधन हुआ. उनकी पहचान केवल सफल फिल्मों से नहीं, बल्कि दर्शकों के साथ बने भावनात्मक रिश्ते से थी. आज भी राजेंद्र कुमार की फिल्में हिंदी सिनेमा के क्लासिक दौर की याद दिलाती हैं, और उनकी रोमांटिक छवि उन्हें सदाबहार सितारों की कतार में बनाए रखती है.

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एससीएच/डीकेपी

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