
jaipur, 20 जनवरी . Rajasthan Police ने मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) और पोस्टमार्टम रिपोर्ट (पीएमआर) तैयार करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटाइज करने का निर्णय लिया है.
यह Police व्यवस्था को कागजी कार्रवाई रहित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
जोधपुर स्थित Rajasthan उच्च न्यायालय के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए 1 फरवरी से पूरे राज्य में हस्तलिखित एमएलसी और पीएमआर रिपोर्टों पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया जाएगा.
Police महानिरीक्षक (अपराध) परम ज्योति ने कहा कि Rajasthan उच्च न्यायालय ने 17 नवंबर, 2025 के एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि सभी एमएलसी और पीएमआर प्रक्रियाएं विशेष रूप से मेडलीएपीआर सॉफ्टवेयर और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) के माध्यम से ही संचालित की जानी चाहिए.
इस आदेश के आधार पर अतिरिक्त Police महानिदेशक (अपराध) और Police महानिरीक्षक, राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो को विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं.
नई प्रणाली के तहत अगर 1 फरवरी 2026 के बाद कोई एमएलसी या पीएमआर मैन्युअल रूप से तैयार किया जाता है और निर्धारित सॉफ्टवेयर का उपयोग नहीं किया जाता है तो सख्त जवाबदेही तय की जाएगी.
संबंधित जिले के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ), जांच अधिकारी और Police अधीक्षक (एसपी) व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे.
jaipur और जोधपुर के Police आयुक्त कार्यालयों में, जिम्मेदारी Police उपायुक्त (डीसीपी) और Police आयुक्त तक बढ़ेगी. Police मुख्यालय (पीएचक्यू) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, एमएलसी और पीएमआर के लिए सभी अनुरोध अब केवल सीसीटीएनएस के माध्यम से ही तैयार किए जाएंगे.
चिकित्सा अधिकारियों द्वारा तैयार की गई अंतिम रिपोर्ट भी इसी प्रणाली के माध्यम से डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराई जाएगी. इस डिजिटल प्रक्रिया से समय की बचत होने, पारदर्शिता सुनिश्चित होने और कानूनी दस्तावेजों में हेरफेर या मानवीय हस्तक्षेप की संभावना समाप्त होने की उम्मीद है.
राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो के महानिरीक्षक अजय पाल लांबा ने सभी जिला Police अधीक्षकों और Police आयुक्तों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन आदेशों का कड़ाई से और तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
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एएसएच/डीकेपी