माणिक्य राजवंश की विरासत को पूर्व सरकार ने किया नजरअंदाज: त्रिपुरा सीएम माणिक साहा

अगरतला, 19 अगस्त . त्रिपुरा के Chief Minister माणिक साहा ने Wednesday को पूर्व वाम मोर्चा Government की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उसने त्रिपुरा के पूर्व शासक माणिक्य राजवंश और महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य के राज्य के विकास में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान को उचित पहचान और सम्मान नहीं दिया.

Chief Minister ने यह बात अगरतला में महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर की 118वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही.

उन्होंने कहा कि जिस इतिहास को लोगों तक पहुंचना चाहिए था, उसे जानबूझकर उनसे दूर रखा गया. उनका आरोप था कि शाही शासनकाल के इतिहास को अतीत तक सीमित रखने की कोशिश की गई, जिससे लोग त्रिपुरा के विकास में उसके योगदान के बारे में न जान सकें.

Prime Minister Narendra Modi के कथन ‘विकास भी, विरासत भी’ का उल्लेख करते हुए सीएम माणिक साहा ने कहा कि देश और समाज के लिए काम करने वाले लोगों को उचित पहचान मिलनी चाहिए. खास तौर पर माणिक्य राजवंश को, जिसने त्रिपुरा के विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए.

Chief Minister ने कहा कि महाराजा बीर बिक्रम के शासनकाल में जनजातीय और गैर-जनजातीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय और एकता थी.

उन्होंने बताया कि महाराजा बीर बिक्रम ने कई विदेशी देशों की यात्रा की थी, जिससे उनका दृष्टिकोण व्यापक हुआ और इसका प्रभाव त्रिपुरा के विकास संबंधी उनके विचारों पर भी पड़ा.

Chief Minister के अनुसार, महाराजा बीर बिक्रम ने राज्य के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं. उन्होंने अगरतला में सबसे पुराने नगर निकायों में से एक की स्थापना की और शहर तथा राज्य के समग्र विकास के लिए अनेक कदम उठाए.

माणिक साहा ने कहा कि महाराजा बीर बिक्रम का योगदान कई क्षेत्रों में फैला हुआ था और उनकी दूरदर्शिता तथा पहलों ने आधुनिक त्रिपुरा के निर्माण में अहम भूमिका निभाई.

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली Government ने जानबूझकर माणिक्य राजवंश और महाराजा बीर बिक्रम के योगदान और विरासत को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे हकदार थे.

Chief Minister ने कहा कि आज भी कुछ लोग माणिक्य राजवंश के उल्लेखनीय योगदान पर चुप्पी साधे हुए हैं. हालांकि वर्तमान Government ने त्रिपुरा के इतिहास में उनकी उचित जगह बहाल करने और उन्हें सम्मान दिलाने के लिए ईमानदार प्रयास किए हैं.

उन्होंने कहा कि पूर्व शाही परिवार, विशेषकर महाराजा बीर बिक्रम के योगदान को वर्तमान पीढ़ी को याद रखना चाहिए और उसका उचित दस्तावेजीकरण होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी त्रिपुरा के विकास में उनकी भूमिका को समझ सकें.

माणिक साहा ने माणिक्य राजवंश की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने और शाही शासनकाल के योगदान को राज्य के इतिहास में उचित स्थान दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया.

उन्होंने कहा कि पूर्व शासकों के योगदान को याद करना केवल इतिहास को स्मरण करना नहीं है, बल्कि उन दूरदर्शी प्रयासों और विकास कार्यों को पहचानना भी है, जिन्होंने त्रिपुरा को आकार देने में भूमिका निभाई.

Chief Minister ने कहा कि राज्य Government माणिक्य राजवंश और महाराजा बीर बिक्रम के ऐतिहासिक योगदान को प्रमुखता से सामने लाने और उनकी विरासत को राज्य के विकास और इतिहास की मुख्यधारा में उचित स्थान दिलाने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगी.

बता दें कि 15 अक्टूबर 1949 को तत्कालीन रीजेंट महारानी कंचन प्रभा देवी और India के गवर्नर जनरल के बीच विलय समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद तत्कालीन रियासत त्रिपुरा India Government के प्रशासन के अधीन आ गया था.

एएमटी/डीकेपी

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